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वित्तीय विवरणों की प्रकृति का वर्णन कीजए। - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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Question

वित्तीय विवरणों की प्रकृति का वर्णन कीजए।

Answer in Brief
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Solution

वित्तीय विवरणों की प्रकृति को इस प्रकार व्यक्त करता है- “वित्तीय विवरणों को एक आवधिक समीक्षा प्रस्तुत करने के लिए या प्रबंध द्वारा की गई प्रगति की रिपोर्ट को दर्शाने के उद्देश्य के लिए तैयार किया जाता है तथा ये व्यवसाय में निवेश की स्थिति से संबंध रखते हैं और समीक्षा अवधि के दौरान उपलब्धि के परिणामों को प्रकट करते हैं। ये अभिलिखित तथ्यों, लेखांकन सिद्धांतों तथा वैयक्तिक निर्णयों के एक संयोजन को प्रतिबिंबित करते हैं।”

निम्नलिखित बिंदु वित्तीय विवरणों की प्रकृति की स्पष्ट व्याख्या करते हैं-

  1. अभिलिखित तथ्य - वित्तीय विवरण खाता पुस्तकों में लागत आँकड़ों के रूप में अभिलिखित तथ्यों के आधार पर तैयार किए जाते हैं। मूल लागत या ऐतिहासिक लागत अभिलिखित लेन-देनों का आधार होती है। विभिन्‍न खातों की राशियाँ जैसे कि हस्तस्थ रोकड़, बैंकस्थ रोकड़, व्यापारिक प्राप्य, स्थाई परिसंपत्तियाँ आदि को खाता पुस्तकों में अभिलिखित राशियों के अनुसार लिया जाता है। 'भिन्‍न-भिन्‍न समयों पर भिन्न मूल्यों पर क्रय की गई परिसंपत्तियों को उनके लागत मूल्य को दर्शाते हुए एक साथ रखा जाता है। चूँकि अभिलिखित तथ्य बाज़ार मूल्य पर आधारित नहीं होते हैं। अतः वित्तीय विवरण संबंद्ध वस्तु की वर्तमान वित्तीय स्थिति को नहीं दर्शाते हैं।
  2. लेखांकन परंपराएँ - वित्तीय विवरण तैयार करते समय कुछ निश्चित लेखांकन परंपराओं का अनुपालन किया जाता है। लागत या बाज़ार मूल्य, जो भी कम हो, पर माल मूल्यांकन की परंपरा अपनाई जाती है। एक परिसंपति को लागत से कम करने हेतु, तुलन-पत्र के लिए, मूल्यहास को अनुपालित किया जाता है। छोटी मदों जैसे कि पेंसिल, पेन, पोस्टेज स्टैम्प आदि के लेन-देन हेतु सारता की परंपरा का अनुपालन किया जाता है। ऐसी मदों को उस वर्ष के व्यय के रूप में प्रदर्शित 'किया जाता है जिसमें वे खरीदी गईं थीं, भले ही वे प्रकृति में परिसंपत्तियाँ हैं। लेखन सामग्री को लागत पर मूल्यांकित किया जाता है न कि लागत या बाज़ार मूल्य पर, जो भी न्यूनतम हो के आधार पर। लेखांकन परंपराओं के उपयोग से वित्तीय विवरण तुलनात्मक, सरल एवं वास्तविकता पूर्ण बन जाते हैं।

  3. अभिधारणाएँ - वित्तीय विवरण कुछ निश्चित मूलभूत संकल्पनाओं या पूर्वानुमानों पर तैयार किए जाते हैं जिन्हें हम अभिधारणाओं के नाम से जानते हैं जैसे सतत्‌ व्यापार, मुद्रा मापन, आगम प्राप्ति आदि। सतत्‌ व्यापार अवधारणा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि व्यवसाय लंबे समय तक चलेगा। अत: परिसंपत्तियाँ ऐतिहासिक लागत आधार पर दर्शायी जाती हैं। मुद्रा मापन अवधारणा के अनुसार “मुद्रा का मूल्य विभिन्‍न समयावधियों पर समान रहेगा।” हालाँकि मुद्रा की क्रय क्षमता में प्रबल परिवर्तन आया है और विभिन्‍न समयाविधियों में क्रय की गईं परिसंपत्तियों को उनके क्रय-मूल्य पर ही दर्शाया जाता है। लाभ व हानि विवरण तैयार करते समय आगम को विक्रय के वर्ष में ही दर्शाया जाएगा। हालाँकि हो सकता है कि विक्रय मूल्य की वसूली एक लंबी अवधि तक होती रहे। इस अवधारणा को आमम प्राप्ति अवधारणा कहते हैं।

  4. वैयक्तिक निर्णय - कई बार वित्तीय विवरणों में प्रस्तुत किए गए तथ्य एवं राशियाँ व्यक्तिगत राय, अनुमानों तथा निर्णयों पर आधारित होती हैं। परिसंपत्ति के ह्रास का निर्धारण स्थिर परिसंपत्तियों के आर्थिक जीवन की उपयोगिता को ध्यान में रखकर होता है। संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान वैयक्तिक अनुमानों एवं निर्णयों पर बनाया जाता है। माल के मूल्यांकन में, लागत या बाज़ार मूल्य, जो भी न्यूनतम है, अपनाया जाता है। जब किसी माल की लागत या फिर बाज़ार मूल्य का निर्णय लेना होता है, तब कुछ निश्चित विचारों के आधार पर अनेक वैयक्तिक निर्णय लेने पड़ते हैं। जब वित्तीय 'विवरणों को तैयार किया जाता है तो व्यक्तिगत राय, निर्णय तथा अनुमान लगाए जाते हैं ताकि 'परिसंपत्तियों, देयताओं, आय एवं व्ययों के आधिक्य की संभावना से बचा जा सके और इसमें रूढिवाद की परंपरा को ध्यान में रखा जाता है।
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वित्तीया विवरणों की प्रकृति
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