Advertisements
Advertisements
Question
उन साक्ष्यों के बारे में चर्चा कीजिए जिनसे पता चलता है कि विद्रोही योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम कर रहे थे?
Advertisements
Solution
1857 ई० के महान विद्रोह से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विद्वान इतिहासकारों का विचार है कि विद्रोही योजनाबद्ध एवं समन्वित ढंग से काम कर रहे थे। भिन्न-भिन्न स्थानों पर होने वाले विद्रोहों के प्रारूप में उपलब्ध समानता का मुख्य कारण विद्रोह की योजना एवं समन्वय में निहित था। लगभग सभी छावनियों में सिपाहियों द्वारा चर्बी वाले कारतूसों के विरुद्ध विद्रोह किया जाना, मेरठ पर अधिकार करने के बाद विद्रोही सिपाहियों का तत्काल राजधानी दिल्ली की ओर प्रस्थान करना तथा मुगल सम्राट बहादुरशाह द्वितीय को नेतृत्व सँभालने का आग्रह करना आदि यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि विद्रोहियों की कार्य पद्धति योजनाबद्ध और समन्वित थी। प्रत्येक स्थान पर विद्रोह का घटना क्रम लगभग एक जैसा था। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह भली-भाँति कहा जा सकता है कि भिन्न-भिन्न छावनियों के सिपाहियों के मध्य अच्छा संचार संबंध स्थापित किया गया था।
उदाहरण के लिए, जब मई के प्रारंभ में सातवीं अवध इर्रेग्युलर कैवेलरी ने नये कारतूसों का प्रयोग करने से इनकार कर दिया तो उन्होंने 48 नेटिव इन्फेंट्री को लिखा था कि-“हमने अपने धर्म की रक्षा के लिए यह फैसला लिया है और 48 इन्फेंट्री के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे स्पष्ट हो जाता है कि विभिन्न छावनियों के मध्य संचार के साधन विद्यमान थे। सिपाही अथवा उनके संदेशवाहक एक स्थान से दूसरे स्थान पर समाचारों को लाने और ले जाने का काम कुशलतापूर्वक कर रहे थे। परस्पर मिलने पर सिपाही केवल विद्रोह की योजनाएँ बनाते थे और उसी विषय में बातें करते थे।
यद्यपि उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर यह कहना कठिन है कि विद्रोह की योजनाओं को किस प्रकार बनाया गया था और इनके योजनाकार कौन थे? किंतु उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह सुनिश्चित रूप से कहा जा सकता है कि विद्रोह की योजना सुनियोजित रूप से की गई थी। चार्ल्स बाल, जो विद्रोह के प्रारंभिक इतिहासकारों में से एक थे, ने उल्लेख किया है कि प्रत्येक रेजीमेंट के देशी अफसरों की अपनी पंचायतें होती थीं जो रात को आयोजित की जाती थीं। इन पंचायतों में विद्रोह संबंधी महत्त्वपूर्ण निर्णयों को सामूहिक रूप से लिया जाता था। उदाहरण के लिए, विद्रोह के दौरान अवध मिलिट्री पुलिस के कैप्टन हियर्स की सुरक्षा का उत्तरदायित्व भारतीय सिपाहियों पर था।
जिस स्थान पर कैप्टन हियर्स नियुक्त था; उसी स्थान पर 41 वीं नेटिव इन्फेंट्री भी नियुक्त थी। इन्फेंट्री का तर्क था कि क्योंकि वे अपने सभी गोरे अफसरों को समाप्त कर चुके हैं, इसलिए अवध मिलिट्री को भी यह कर्तव्य है कि या तो वे हियर्स को समाप्त कर दें या उसे कैद करके 41 वीं नेटिव इन्फेंट्री को सौंप दे। किंतु मिलिट्री पुलिस ने इन दोनों दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अतः यह निश्चय किया गया कि इस विषय के समाधान के लिए प्रत्येक रेजीमेंट के देशी अफसरों की एक पंचायत को बुलाया जाए। समकालीन साक्ष्यों में रात के समय कानपुर सिपाही लाइनों में आयोजित की जाने वाली इस प्रकार की पंचायतों का उल्लेख मिलता है। इन सभी लाक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि विद्रोही योजनाबद्ध एवं समन्वित ढंग से काम कर रहे थे।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व सँभालने के लिए पुराने शासकों से क्यों आग्रह किया?
1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी?
एक चित्र और एक लिखित पाठ को चुनकर किन्हीं दो स्रोतों की पड़ताल कीजिए और इस बारे में चर्चा कीजिए। कि उनसे विजेताओं और पराजितों के दृष्टिकोण के बारे में क्या पता चलता है?
