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‘तुकाराम जी संत ही नहीं समाज सुधारक भी थे’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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Question

‘तुकाराम जी संत ही नहीं समाज सुधारक भी थे’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief
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Solution

तुकाराम का जन्म पुणे जिले के अंतर्गत देहू नामक ग्राम में हुआ। पूर्व के आठवें पुरुष विश्वंभर बाबा से इनके कुल में विठ्ठल की उपासना बराबर चली आ रही थी। इनके कुल के सभी लोग पंढरपुर की यात्रा के लिए नियमित रूप से जाते थे। देहू गाँव के महाजन होने के कारण वहाँ इनका कुटूंब प्रतिष्ठित माना जाता था। इनकी बाल्यावस्था माता कनकाई व पिता बोल्होबा की देखरेख में अत्यंत दुलार से बीती, किंतु जब ये प्राय: 18 वर्ष के थे इनके माता-पिता का स्वर्गवास हो गया। उनकी दूसरी पत्नी 'जीजाबाई' एक धनी परिवार की बेटी थीं और बहुत ही कर्कश स्वभाव की थीं। तुकाराम अपनी पहली पत्नी और बेटे की मृत्यु के बाद बहुत दुखी थे। तुकाराम का मन विट्ठल के भजन में लगता था, जिससे उसकी दूसरी पत्नी दिन-रात ताना मारती थी। तुकाराम एक क्षत्रिय परिवार से थे और एक व्यवसायी थे, लेकिन दुख और लगातार घाटे के कारण वह सफल नहीं हो सके। जिंदगी पर उनका भरोसा उठ चुका था। ऐसे में उन्हें किसी सहारे की बेहद जरूरत थी। लौकिक सहारा तो किसी का था नहीं, तो पाइुरंग पर उन्होंने अपना सारा भार सौंप दिया और साधना शुरू की, जबकि उस वक्‍त उनके गुरु कोई भी नहीं थे। उनका कहना था कि दुनिया में कोई भी दिखावटी चीज नहीं टिकती। झूठ लंबे समय तक संभाला नहीं जा सकता। झूठ से सख्त परहेज रखने वाले तुकाराम को संत नामदेव का रूप माना गया है। उन्हें आडंबर से घृणा थी। वे चाहते थे कि झूठा-झूठ बताकर लोगों को ठगने वाले ढोंगियों, झूठ-मूठ की गलत भविष्यवाणी करे वालो तथा क्षुद्र देवताओं की उपासना करने वालों से लोग दूर रहें। भगवान विठ्ठल ने उन्हें स्वप्न में मोक्ष का मार्ग दिखाया। जिसके बाद उन्होंने सांसारिक जीवन से मुँह मोड़ लिया।

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नवनीत
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Chapter 2.06: नवनीत - स्वाध्याय [Page 81]

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Balbharati Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.06 नवनीत
स्वाध्याय | Q १ | Page 81
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