English

सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दब है अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है आधे आधे गाने तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये ऊसर बंजर तोड़ो ये चरती परती तोड़ो सब खेत बनाकर छोड़ो - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या 100 शब्दों में कीजिए।

सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो
Writing Skills
Advertisements

Solution

संदर्भ: यह पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि अज्ञेय की कविता ‘आधे-अधूरे गीत’ से ली गई हैं। कवि आधुनिक जीवन की नीरसता और मनुष्य के भीतर व्याप्त ऊब को व्यक्त करता है।

प्रसंग: कवि यहाँ मनुष्य की उस स्थिति का वर्णन करता है जहाँ बाह्य संसार तो जीवनदायी और सृजनशील है, परंतु मनुष्य का मन अंदर से सूखा और असंतुष्ट है।

व्याख्या: कवि कहता है कि मिट्टी में तो रस है जिससे जीवन और हरियाली उत्पन्न होती है, परंतु मनुष्य के मन के मैदानों में ऊब और शून्यता फैली हुई है। मनुष्य के गीत भी अब अधूरे हैं, जिनमें न उत्साह है न पूर्णता। यह अधूरापन आधुनिक मनुष्य की मानसिक थकान और संवेदनहीनता का प्रतीक है।

विशेष: कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से आधुनिक समाज की आंतरिक रिक्तता और भावनात्मक शुष्कता का प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत किया है।

shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
2025-2026 (March) Board Sample Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×