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Question
निम्नलिखित पठित काव्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जब भी पानी किसी के सर से गुजर जाएगा। × × × × आँखों में बहुत बाढ़ है, शेष सब कुशल। × × × × सड़क ने जब मेरे पैरों की उँगलियाँ देखीं; × × × × साँस हमारी हमें पराये धन-सी लगती है, × × × × किसी का सर खुला है तो किसी के पाँव बाहर हैं, × × × × वह जो मजदूर मरा है, वह निरक्षर था मगर, |
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2)
- पानी सर से गुजर जाने का अर्थ क्या है ?
- आँखों से आँसू बाढ़ की तरह क्यों बहते रहते हैं ?
- मजदूर रोज क्या लिखता था ?
- कवि को अपनी साँस कैसी लगती है?
2. निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए: (2)
- नदी - ______
- उँगलियाँ - ______
- किताब - ______
- आँखों - ______
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए। (2)
'आकाश के तारे तोड़ लाना' - इस मुहावरे को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
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Solution
1.
- पानी सर से गुजर जाने का अर्थ है परिस्थिति का हाथों से निकल जाना।
- जीवन में निरंतर मिलती निराशाओं के कारण आँखों से आँसू बाढ़ की तरह बहते रहते हैं।
- मजदूर रोज किताब लिखता था।
- कवि को अपनी साँस पराए धन-सी लगती हैं।
2.
- नदी - नदियाँ
- उँगलियाँ - उँगली
- किताब - किताबें
- आँखों - आँख
3. आकाश के तारे तोड़ लाना मुहावरे का अर्थ है असंभव काम करना। जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य की पूर्ति कर दे, जिसे कर पाना असंभव माना जा रहा हो तब उसके इस असंभव कार्य के लिए उपर्युक्त मुहावरे का प्रयोग किया जाता है। असीमित कठिनाइयों से भरा कोई काम, जिसे कर पाने में सभी असहज हों, वह कार्य विशेष कर पाना सभी को असंभव लगे, तब यह मुहावरा दोहराया जाता है। जैसे तुम्हें क्या लगता है कि नलिन कुछ कर नहीं सकता। अरे... समय आने पर वह आकाश के तारे भी तोड़कर ला सकता है।
