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Question
निम्नलिखित विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो:
सर्वदा सकारात्मक सोच रखने वाले मनुष्य के जीवन से सभी मुश्किलें बड़ी आसानी से दूर हो जाती हैं और यदि सोच नकारात्मक हो, तो जीवन में दुःख के सिवा कुछ प्राप्त नहीं होता। इस विषय के सम्बन्ध में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
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Solution
“सकारात्मक सोच”
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह किसी भी कार्य को करने से पहले उसका अनुमान लगाता है, अनुपात तय करता है, आवश्यक समायोजन करता है और फिर उसका विश्लेषण करता है। शारीरिक श्रम की तुलना में मानसिक श्रम अधिक प्रभाव डालता है। इसी कारण मनुष्य अपने कार्यों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की सोच के साथ करता है।
जब व्यक्ति नकारात्मक सोच के साथ कार्य करता है, तो वह छोटे से कार्य को भी बहुत बड़ा और कठिन समझने लगता है तथा शीघ्र ही उससे छुटकारा पाना चाहता है। जब वह इसमें सफल नहीं हो पाता, तो इसका दुष्प्रभाव उसके शरीर पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर मस्तिष्क पर होता है। इस संदर्भ में एक उदाहरण प्रस्तुत है।
एक सुबह का समय था। बाजार खुलने में अभी समय था। बाजार में रूई (कपास) से भरा एक ट्रक खाली किया जा रहा था। उसी समय वहाँ से एक चालक गुजर रहा था। उसने रूई से भरा ट्रक देखा और अपने काम के दौरान यह सोचने लगा कि इतनी अधिक रूई आखिर कौन जलाएगा। यह विचार बार-बार उसके मन में आता रहा, जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह मानसिक रोगी बन गया।
परिजनों ने उसे मनोचिकित्सक के पास ले गए, पर वह वहाँ भी यही प्रश्न दोहराता रहा - “इतनी रूई कौन जलाएगा?” अगले दिन चिकित्सक ने उसे पुनः बुलाया और उसे अलग ले जाकर उसके कान में कहा - “कल बाजार में एक ट्रक में आग लग गई थी, और कहा जा रहा है कि वह रूई से भरा हुआ था।” यह सुनकर वह चकित हो गया और बोला - “डॉक्टर साहब, क्या यह सच है?” जब डॉक्टर ने इसकी पुष्टि की, तो उसके मन से यह चिंता समाप्त हो गई और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
इसी प्रकार, यदि व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ कार्य करे, तो वह बिना किसी मानसिक दबाव के प्रसन्नतापूर्वक अपने कार्य करता है और उसे यह भी अनुभव नहीं होता कि कब इतना बड़ा कार्य पूर्ण हो गया। उदाहरणस्वरूप, तेज बहाव वाली नदियों पर पुल बनाना, पहाड़ी और समतल क्षेत्रों में लंबे एक्सप्रेस-वे तैयार करना, ऊँची इमारतों का निर्माण करना, तथा जनसाधारण के लिए उद्यान विकसित करना। सकारात्मक सोच के कारण व्यक्ति स्वस्थ रहता है और कार्य भी सरलता से पूरे हो जाते हैं।
सकारात्मक सोच ही मनुष्य को सफलता की ओर ले जाती है, जबकि नकारात्मक सोच रखने वाले लोग जीवन में असफलता और दुःख का सामना करते हैं। इसलिए हमें सदैव आशावादी और सकारात्मक जीवन जीना चाहिए, क्योंकि यही मानव और मानवता के कल्याण का मार्ग है।
आज मानव ने जल, थल, नभ और अंतरिक्ष में जो अभूतपूर्व प्रगति की है, वह सकारात्मक सोच का ही परिणाम है। यह विकास हमें हर क्षेत्र में दिखाई देता है और आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी मार्ग का अनुसरण कर रही हैं। वे प्रत्येक कार्य को सहजता से पूरा कर रही हैं। आशा है कि इसी प्रकार संसार निरंतर प्रगति करता रहेगा और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का विस्तार होता रहेगा।
