English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

संजाल पूर्ण कीजिए: राजेंद्र बाबू की पत्‍नी के गुण - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

Advertisements
Advertisements

Question

संजाल पूर्ण कीजिए:

Chart
Advertisements

Solution

shaalaa.com
अनोखे राष्‍ट्रपति
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.5: अनोखे राष्‍ट्रपति - स्‍वाध्याय [Page 20]

APPEARS IN

Balbharati Hindi (Composite) Lokvani [English] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.5 अनोखे राष्‍ट्रपति
स्‍वाध्याय | Q (१) | Page 20

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

मुझे आज भी वह संध्या नहीं भूलती जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति को मैंने सामान्य आसन पर बैठकर दिन भर के उपवास के उपयंत्त केवल कुछ उबले आलू खाकर पारायण करते देखा। मुझे भी वही खाते देखकर उनकी दृष्टि में संतोष और ओठों पर बालकों जैसी सरल हँसी छलक उठी। जीवन मूल्यों की परख करने वाली दृष्टि के कारण उन्हें देशरत्न की उपाधि मिली और मन की सरल स्वच्छता ने उन्हें अजातशत्रु बना दिया। अनेक बार प्रश्न उठता है, “क्या वह साँचा टूट गया जिसमें ऐसे कठिन कोमल चरित्र ढलते थे ?”

(1) कृति पूर्ण कोजिए-  (2)

(2) (i) समानार्थी शब्द परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए।  (1)

वह संध्या नहीं भूलती।

(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए:  (1)

  1. मरण × ______
  2. प्रातः × ______

(3) प्रथम राष्ट्रपति की चरित्रगत विशेषताएँ क्या थीं? 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

पहले बड़ी फिर छोटी, फिर उनसे छोटी के क्रम से बालिकाएँ मेरे संरक्षण में आ गईं। उन्हें देखने प्रायः उनकी दादी और कभी-कभी दादा भी प्रयाग आते रहे। तभी राजेंद्र बाबू की सहधर्मिणी के निकट संपर्क में आने का अवसर मिला। वे सच्चे अर्थ में धरती की पुत्री थीं। वे साध्वी, सरल, क्षमामयी, सबके प्रति ममतालु और असंख्य संबंधों की सूत्रधारिणी थीं। ससुराल में उन्होंने बालिकावधू के रूप में पदार्पण किया था। संभ्रांत जमींदार परिवार की परंपरा के अनुसार उन्हें घंटों सिर नीचा करके एकासन बैठना पड़ता था, परिणामतः उनकी रीढ़ की हड्डी इस प्रकार झुक गई कि युवती होकर भी वे सीधी खड़ी नहीं हो पाती थीं।

बालिकाओं के संबंध में राजेंद्र बाबू का स्पष्ट निर्देश था कि वे सामान्य बालिकाओं के समान बहुत सादगी और संयम से रहें। वे खादी के कपड़े पहनती थीं, जिन्हें वे स्वयं ही धो लेती थीं। उनके साबुन-तेल आदि का व्यय भी सीमित था। कमरे की सफाई, झाड़-पोंछ, गुरुजनों की सेवा आदि भी उनके अध्ययन के आवश्यक अंग थे।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए :     [2]

(2) (i) निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:    [1]

  1. बालक - 
  2. धरती - 

(ii) कृति पूर्ण कीजिए:   [1]

(3) "सदा जीवन उच्च विचार" विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।   [2]


कृति में जानकारी लिखिए:


उत्‍तर लिखिए:


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×