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सहसंबंध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए। - Geography (भूगोल)

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Question

सहसंबंध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।

Long Answer
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Solution

सहसंबंध की गहनता का मापन दोनों चरों में अनुरूपता या साहचर्य की मात्रा पर निर्भर करता है। इस अनुरूपता
अथवा साहचर्य की गहनता की मात्रा गणितीय दृष्टि से -1 से शून्य की ओर बढ़ते हुए +1 तक हो सकती है। अतः इसका मान किसी भी परिस्थिति में ± 1 से अधिक नहीं हो सकता।। सह संबंध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे वह धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे पूर्ण सहसंबंध क़हते हैं। गहनतम सहसंबंध के दो विपरीत सिरों ± 1 के ठीक मध्य में (शून्य) 0 सहसंबंध की स्थिति होती है। इस बिंदू पर या उसके समीप चरों की उपस्थिति सहसंबंध के अभाव को दर्शाती है।

दो चरों के मध्य विशिष्ट साहचर्य को दर्शाने के लिए बनाए गए आरेख को प्रकीर्ण आरेख अथवा प्रकीर्ण अंकन कहते हैं। रेखाचित्र पर X तथा Y मानों का बिखराव अथवा प्रकीर्णन सहसंबंध की गहनता को दर्शाते हैं। प्रकीर्ण आरेख पर जब एक सरल रेखा निचले बाँए से ऊपरी दाएँ भाग की ओर अग्रसर होती हैं तो यह पूर्ण धनात्मक सहसंबंध (1.00) को दर्शाती है। इसके विपरीत जब यह रेखा ऊपरी बाएँ से निचले दाएँ भाग की ओर जाती है। तब पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध (-1.00) को दर्शाती है। सहसंबंध का अभाव होने पर या शून्य सहसंबंध होने पर X तथा Y चरों में कोई परिवर्तन नहीं होता। प्रकीर्ण आरेख पर X तथा Y चरों का बिखराव X तथा Y अक्ष के समान्तर होता है और समांतर सरल रेखाएँ दिखाई देती हैं।

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सहसंबंध की गहनता
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