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‘सारा आकाश’ उपन्यास ने समाज की उन नारियों का प्रतिनिधित्व किया है जो पारिवारिक कलह को सहन कर परिवार में सुख–सम्पन्नता लाना चाहती हैं। इस कथन के आलोक में प्रभा का चरित्र–चित्रण कीजिए। - Hindi (Indian Languages)

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Question

‘सारा आकाश’ उपन्यास ने समाज की उन नारियों का प्रतिनिधित्व किया है जो पारिवारिक कलह को सहन कर परिवार में सुख–सम्पन्नता लाना चाहती हैं। इस कथन के आलोक में प्रभा का चरित्र–चित्रण कीजिए।

Very Long Answer
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Solution

प्रभा एक आदर्श भारतीय नारी का प्रतीक है। लेखक राजेन्द्र यादव ने उसके चरित्र को अनेक गुणों से भरपूर और सर्वगुण-संपन्न रूप में प्रस्तुत किया है। उसके व्यक्तित्व में सद्गुणों की भरमार है।

अपने छात्र जीवन में प्रभा एक चंचल, साहसी और महत्वाकांक्षी युवती थी। उसका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि लोग उससे प्रभावित भी होते थे और कुछ हद तक भयभीत भी। वह स्वभाव से निर्भीक और सिंहनी के समान साहसी थी, इसी कारण उसे ‘परवती’ भी कहा जाता था। वह विचारशील स्वभाव की थी। उसकी सहेली रमा के साथ उसके गहरे वैचारिक संबंध थे और दोनों एक-दूसरे के विचारों को साझा करती थीं।

कभी-कभी दोनों का यह विचार होता था कि वे विवाह के बंधन में नहीं बंधेंगी, बल्कि अच्छी शिक्षा प्राप्त करेंगी, कॉलेज में अध्ययन करेंगी और उच्च पदों पर कार्य करेंगी। वे एक सुख-संपन्न जीवन की कल्पना करती थीं-जहाँ वे प्राध्यापक होंगी, उनका बड़ा-सा बंगला होगा, दो-चार नौकर होंगे, आने-जाने के लिए वाहन होगा, शाम को खेलने के लिए बैडमिंटन कोर्ट, सुंदर लॉन और उसकी देखरेख के लिए माली होगा। इस प्रकार प्रभा एक अत्यंत महत्वाकांक्षी बालिका थी।

समय के साथ प्रभा ने गृहस्थ जीवन को स्वीकार किया और उसमें कुशलता से स्वयं को ढाल लिया। वह सास-ससुर की सेवा करने लगी, जेठ आदि का सम्मान करती रही और ननद, मुन्ना व जिज्ञानी के साथ मित्रवत व्यवहार किया। उसने अपेक्षा से अधिक घर-गृहस्थी का कार्य संभाला। वह एक विकासशील स्त्री थी, किंतु घरेलू जिम्मेदारियों के जाल में इतनी उलझ गई कि आगे अपने व्यक्तिगत विकास को आगे नहीं बढ़ा सकी।

प्रभा अत्यंत सहनशील थी। यद्यपि प्रारंभ में पति का व्यवहार उसके अनुकूल नहीं था, फिर भी उसने कभी किसी से शिकायत नहीं की-यहाँ तक कि अपने माता-पिता से भी नहीं। उसने सभी कठिनाइयों को मौन रहकर सहन किया। यही भारतीय नारी की चरम सहनशीलता और त्याग का प्रतीक है। उसने अपने पति समर से कोई बात छिपाई नहीं, बल्कि हर बात स्पष्ट रूप से बताती रही, यहाँ तक कि कमर में बँधी पोटली का रहस्य भी उसे बता दिया।

जब समर छत को पक्का करने के लिए बार-बार पानी भरकर ऊपर ले जा रहा था, तो प्रभा ने उसके परिश्रम को देखकर अनुमान लगाया कि उसकी टाँगों में अवश्य दर्द होगा और उसने मन ही मन यह निश्चय किया कि आज उसे दवा देगी।

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि प्रभा एक आदर्श भारतीय नारी है, जो भारतीय परिवार की आधारशिला होती है। वह अपने सतत प्रयासों से परिवार के सभी सदस्यों को सुखी और समृद्ध देखना चाहती है।

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