English

रामनिहाल फिर रुक गया। श्यामा ने फिर तीखी दृष्टि से उसकी ओर देखा। रामनिहाल कहने लगा, “तुमको भी संदेह हो रहा है। सो ठीक ही है। मुझे भी कुछ संदेह हो रहा है, मनोरमा क्यों मुझे इस समय - Hindi

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए :-

रामनिहाल फिर रुक गया। श्यामा ने फिर तीखी दृष्टि से उसकी ओर देखा। रामनिहाल कहने लगा, “तुमको भी संदेह हो रहा है। सो ठीक ही है। मुझे भी कुछ संदेह हो रहा है, मनोरमा क्यों मुझे इस समय बुला रही है।”

संदेह - श्री जयशंकर प्रसाद
Sandeh - Shri Jaishankar Prashad

  1. रामनिहाल और श्यामा का संबंध स्पष्ट करते हुए बताइए कि रामनिहाल ये बातें श्यामा से क्यों बता रहा है? [2]
  2. ‘तुमको भी संदेह हो रहा है’ - यह कथन वक्ता के किस संदेह को प्रकट करता है? संदेह की यह स्थिति कब से उत्पन्न हुई? समझाइए। [2]
  3. मनोरमा का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताइए कि वह किस संकट से ग्रस्त थी? वह रामनिहाल से किस प्रकार की सहायता चाहती थी? [3]
  4. प्रस्तुत कहानी के अन्त में ‘श्यामा’ ने रामनिहाल को क्या सलाह दी थी? ‘संदेह’ कहानी से आपको क्या शिक्षा मिली? समझाकर लिखिए। [3]
Comprehension
Advertisements

Solution

  1. रामनिहाल, श्यामा के घर में एक किराएदार के रूप में रहता है, परंतु उन दोनों के बीच एक गहरा आत्मीय और विश्वासपूर्ण संबंध है। रामनिहाल श्यामा को एक ऊँचे आदर्श के रूप में देखता है और उसका बहुत सम्मान करता है। वह ये बातें श्यामा को इसलिए बता रहा है क्योंकि वह अपने मन के द्वंद्व और मनोरमा के पत्र से उत्पन्न उलझन को अकेले नहीं सुलझा पा रहा है। उसे श्यामा की समझदारी पर पूरा भरोसा है और वह उसके सामने अपने मन को हल्का करना चाहता है।
  2. यहाँ वक्ता (रामनिहाल) को यह संदेह है कि शायद मनोरमा उसे प्रेम करती है और इसीलिए उसने उसे बुलाया है। साथ ही, उसे यह भी लगता है कि श्यामा भी उसके और मनोरमा के संबंध को लेकर शंका कर रही है। संदेह की यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मनोरमा ने रामनिहाल को पत्र लिखकर सहायता के लिए बुलाया। रामनिहाल को लगा कि एक संपन्न परिवार की स्त्री उसे ही क्यों याद कर रही है, जिससे उसके मन में अपने आकर्षण को लेकर भ्रम पैदा हो गया।
  3. मनोरमा एक धनी परिवार की शिक्षित स्त्री और मोहन बाबू की पत्नी थी। वह अपने पारिवारिक जीवन में भारी संकट से गुजर रही थी क्योंकि उसके पति (मोहन बाबू) शंकालु स्वभाव के थे और मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। साथ ही, उसके संबंधी (बृजकिशोर) उनकी संपत्ति हड़पने के लिए षड्यंत्र रच रहे थे। वह रामनिहाल से एक रक्षक और सच्चे मित्र के रूप में सहायता चाहती थी ताकि वह इन कानूनी और पारिवारिक साजिशों से बाहर निकल सके और अपने पति की स्थिति को संभाल सके।
  4. कहानी के अंत में श्यामा ने रामनिहाल को सलाह दी कि वह अपने मन के फालतू संदेहरूपी जाले को साफ करे और तुरंत मनोरमा की सहायता के लिए जाए। उसने कहा कि एक असहाय स्त्री को तुम्हारी मदद की जरूरत है, इसलिए अपने व्यक्तिगत संकोच को छोड़कर कर्तव्य का पालन करो। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ‘संदेह’ मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है जो अच्छे-भले रिश्तों और विवेक को नष्ट कर देता है। हमें परिस्थितियों को दूसरों के नजरिए से भी देखना चाहिए और संशय के आधार पर किसी के चरित्र या उद्देश्य पर प्रश्नचिन्ह लगाने के बजाय अपने कर्तव्य और सत्य पर अडिग रहना चाहिए।
shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
2025-2026 (March) Official Board Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×