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“राजा के दरबार में जैये समया पाय। साईं तहाँ न बैठिए, जहँँ कोउ देय उठाय जहँ कोड देय उठाय बोल अनबोले रहिए हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए ।। - Hindi

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Question

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:-

“राजा के दरबार में जैये समया पाय।
साईं तहाँ न बैठिए, जहँँ कोउ देय उठाय
जहँ कोड देय उठाय बोल अनबोले रहिए
हँसिये नहीं हहाय, बात पूछे ते कहिए ।।
कह गिरिधर कविराय समय सों कीजै काजा
अति आतुर नहिं होय, बहुरि अनखेहैं राजा

गिरिधर की कुण्डलियाँ - गिरिधर कविराय
Giridhar ki “Kundaliya” - Giridhar Kavirai

  1. राजा के दरबार में जाने से पहले किस बात का ध्यान रखना चाहिए और क्यों? [2]
  2. राजदरबार में बैठने और बोलने से पहले किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? [2]
  3. ‘अनखैहें’ शब्द का क्या अर्थ है? राजा कब और क्यों अनखें हो जाते हैं? [3]
  4. कवि गिरिधर की कुण्डलियाँ हमें क्या सीख देती हैं? हमें कहाँ हँसना नहीं चाहिए? राजा के दरबार में कैसा आचरण करना चाहिए? [3]
Comprehension
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Solution

  1. राजा के दरबार में जाने से पहले उचित समय का ध्यान रखना चाहिए। कवि के अनुसार, हमें दरबार में तभी जाना चाहिए जब सही समय हो। यदि हम बिना समय या गलत समय पर जाते हैं, तो हमारा कार्य सिद्ध नहीं होता और हमें अपमानित भी होना पड़ सकता है।
  2. राजदरबार में ऐसी जगह नहीं बैठना चाहिए जहाँ से कोई आपको उठा दे। हमें अपनी मर्यादा और स्थिति के अनुसार ही उचित स्थान पर बैठना चाहिए। और दरबार में अनावश्यक रूप से नहीं बोलना चाहिए। जब तक आपसे कुछ पूछा न जाए, तब तक चुप रहना चाहिए और पूछने पर ही अपनी बात कहनी चाहिए।
  3. ‘अनखैहें’ शब्द का अर्थ है - नाराज होना, रुष्ट होना या क्रोधित होना। यदि जब कोई व्यक्ति राजा के सामने बहुत अधिक जल्दबाजी दिखाता है या बिना समय और मर्यादा का विचार किए व्यवहार करता है, तब राजा उस पर नाराज हो जाते हैं।
  4. गिरिधर की कुण्डलियाँ हमें लोक-व्यवहार और व्यावहारिक नीति की सीख देती हैं। यह हमें सिखाती है कि व्यक्ति को समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार ही आचरण करना चाहिए। हमें राजा के दरबार या किसी भी गंभीर सभा में जोर-जोर से नहीं हँसना चाहिए। और हमें दरबार में अत्यंत संयमित, धैर्यवान और मर्यादित आचरण करना चाहिए। शांत रहकर सही समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए और अपनी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
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