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Question
निम्नलिखित विषय पर मौलिक कहानी लिखिए:
एक ऐसी मौलिक कहानी लिखिए जिसका अन्तिम वाक्य हो- ______ काश! बचपन के वे दिन फिर से लौट आते!
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Solution
बचपन के दिन वास्तव में बहुत ही खास और यादगार होते हैं। बच्चों का मन अत्यंत कोमल और निष्कपट होता है, जिसमें किसी प्रकार की चालाकी या कपट नहीं होता। मुझे भी अपने बचपन की एक घटना आज तक याद है, जिसे मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहती हूँ। बचपन में बच्चों को चाट, टॉफी और अन्य चटपटी चीज़ें खाने में बहुत आनंद आता है। मुझे भी इन चीज़ों का बहुत शौक था और मैं हमेशा इन्हें खाने की इच्छा रखती थी।
बचपन में मुझे रोज़ाना खर्च के लिए एक रुपया मिला करता था। एक दिन घर के आँगन में खेलते-खेलते मेरे मन में एक विचार आया कि यदि मैं उस पैसे को ज़मीन में दबा दूँ, तो शायद वहाँ से पैसों का पेड़ उग आएगा। उस पेड़ से मैं ढेर सारी टॉफियाँ, चॉकलेट और चटपटी चीज़ें खरीद सकूँगी। यह सोचकर मैंने अपनी दादी से बिना कुछ बताए एक रुपये का सिक्का लिया और आँगन में एक जगह खोदकर उसे ज़मीन के नीचे दबा दिया।
इसके बाद मैं रोज़ सुबह विद्यालय जाने से पहले वहाँ पानी डालने लगी। कई दिन बीत गए, लेकिन वहाँ से कोई पौधा नहीं निकला। यह देखकर मैं बहुत उदास हो गई। अंततः मैंने दादी से जाकर पूछा कि कोई पौधा कितने दिनों में उगता है। दादी ने बताया कि सामान्यतः पौधा 15–20 दिनों में उग जाता है, लेकिन जब मैंने उन्हें अपने पैसे वाले पौधे के बारे में बताया, तो वे मुस्कुरा पड़ीं।
दादी ने प्यार से मुझे समझाया कि पैसे किसी पेड़ पर नहीं उगते, बल्कि उन्हें मेहनत और परिश्रम से कमाया जाता है। उनकी यह बात सुनकर मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। दादी ने मुझे गोद में बैठाकर समझाया कि यदि मैं मन लगाकर पढ़ाई करूँ और कड़ी मेहनत करूँ, तो भविष्य में बहुत कुछ हासिल कर सकती हूँ।
इसके बाद दादी ने अपने थैले से एक रुपये का सिक्का निकालकर मुझे दिया। मैंने खुशी-खुशी वह पैसा ले लिया। आज अपने जीवन में जब भी पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो यह समझ आती है कि बचपन की वे मासूम गलतियाँ बहुत कुछ सिखा जाती हैं। काश! बचपन के वे दिन फिर से लौट आते!
