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Question
निम्नलिखित विषय पर मौलिक कहानी लिखिए।
‘अच्छे-बुरे की पहचान विपत्ति के समय ही होती है।’
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Solution
‘अच्छे-बुरे की पहचान विपत्ति के समय ही होती है।’
गाँव में रवि नाम का एक मेहनती और ईमानदार युवक रहता था। उसके पास थोड़ी-सी कृषि भूमि थी, जिससे वह अपने परिवार की आजीविका चलाता था। रवि को उसकी ईमानदारी और मेहनत के लिए सभी जानते थे। उसके कई दोस्त थे, जो उसकी उदारता की सराहना करते और उससे जुड़ाव बनाए रखते थे। रवि को हमेशा यह विश्वास रहता था कि जैसे वह अपने दोस्तों को पसंद करता है, वैसे ही वे भी उसे उतना ही मानते हैं।
रवि का जीवन पहले अच्छी तरह से चल रहा था, लेकिन एक दिन अचानक आई तेज़ तूफ़ान और ओलावृष्टि ने उसकी सारी फसल बर्बाद कर दी। इस आपदा ने उसे भारी कर्ज में डुबो दिया। गाँव के लोग उससे सहानुभूति तो जताते रहे, लेकिन उसे असल में मदद की ज़रूरत थी।
सबसे पहले रवि ने अपने उन दोस्तों से सहायता माँगी, जो हमेशा उसकी दोस्ती की क़समें खाते थे। मगर किसी ने पैसे न होने का बहाना बनाया, तो किसी ने अपनी परेशानियाँ गिनाईं। कुछ तो उससे मिलने से भी कतराने लगे। रवि को धीरे-धीरे एहसास हुआ कि जो लोग अच्छे समय में साथ थे, वे बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ चुके हैं। अब वह इस चिंता में डूब गया कि वह अपना घर और ज़मीन कैसे बचाएगा।
उसी समय गाँव के बुज़ुर्ग और सरल किसान रामू काका उसके पास आए। रवि की हालत देखकर उन्होंने कहा, “बेटा, मुश्किल समय में ही रिश्तों की असली पहचान होती है।”
रामू काका ने अपनी जमा पूँजी से कुछ पैसे रवि को दिए और कहा कि जब उसका समय सुधर जाए, तब वह पैसे लौटा सकता है। गाँव के कुछ अन्य गरीब किसानों ने भी आगे आकर बीज और खाद जैसे ज़रूरी संसाधनों से उसकी मदद की, ताकि वह दोबारा खेती शुरू कर सके।
रवि ने पूरी मेहनत से खेतों में काम किया, और अगली फसल से उसे अच्छा लाभ हुआ। धीरे-धीरे उसने अपना कर्ज चुकाया और रामू काका का उधार भी ईमानदारी से लौटा दिया।
