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निम्नलिखित संरचना का संक्षेप में वर्णन कीजिए - नेत्र

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Question

निम्नलिखित संरचना का संक्षेप में वर्णन कीजिए -

नेत्र

Answer in Brief
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Solution

नेत्र की संरचना

मनुष्य में एक जोड़ी नेत्र चेहरे पर सामने की ओर नेत्र कपाल के नेत्र कोटर में स्थित होते हैं। प्रत्येक नेत्र एक तरल से भरे गोलक के रूप में होता है। नेत्र गोलक का 4/5 भाग नेत्र कोटर में और लगभग 1/5 भाग नेत्र कोटर के बाहर स्थित होता है। नेत्र गोलक की भित्ति तीन स्तरों से बनी होती है। सबसे बाहरी दृढ़पटल, मध्य रक्तकपटल तथा भीतरी दृष्टिपटल है।

1. दृढ़पटल या स्क्ले रोटिक - यह तन्तुमय संयोजी ऊतक का बना सबसे बाहरी स्तर है। इसका वह भाग जो नेत्र कोटर से बाहर होता है, पारदर्शी होता है तथा इसे कॉर्निया कहते हैं।

मानव नेत्र की रचना - खड़ी काट में |

2. रक्तकपटल या कोरॉइड - नेत्र गोलक की भित्ति का मध्य स्तर है। रक्तकपटल संयोजी ऊतक का बना स्तर है जिसमें रुधिर केशिकाओं का घना जाल होता है। रक्तकपटल में रंगायुक्त कोशिकाएँ होती हैं, जिस कारण नेत्र का रंग काला, भूरा, सुनहरा या नीला दिखाई देता है।

रक्तकपटल का वह भाग जो कॉर्निया के नीचे होता है, थोड़ा पीछे हटकर एक पेशीय पर्दे जैसी रचना बनाता है जिसे आइरिस या उपतारा कहते हैं। आइरिस अरीय तथा वर्तुल पेशियों का बना होता है। आइरिस के मध्य में एक गोल छिद्र होता है जिसे तारा या पुतली कहते हैं। अरीय पेशियाँ तारे के छिद्र को बड़ा करती हैं; अतः इन्हें प्रसारी पेशियाँ कहते हैं। वर्तुल पेशियाँ तारे के छिद्र को छोटा या संकुचित करती हैं; अतः इन्हें स्फिक्टर (अवरोधिनी) पेशियाँ कहते हैं। तारा नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियन्त्रित करता है।

आइरिस व तारे की रचना

आइरिस के आधार पर रक्तकपटल अत्यधिक मोटा व पेशीयुक्त होकर सीलियरी काय बनाता है।

3. दृष्टिपटल या रेटिना - यह नेत्र भित्ति का सबसे भीतरी प्रकाश संवेदी स्तर है। रेटिना में रक्तकपटल की ओर एक पतला वर्णक स्तर तथा भीतर की ओर तन्त्रिका संवेदी स्तर होता है। तन्त्रिको संवेदी स्तर प्रकाश के लिए संवेदनशील होता है। यह निम्नलिखित प्रकार की पर्यों से बना होता है-

(i) दृष्टि शलाकाओं एवं शंकुओं का स्तर - शलाकाओं में दृष्टि पर्पल वर्णक रोडोप्सिन तथा शंकुओं में दृष्टि वॉयलेट वर्णक आयोडोप्सिन पाए जाते हैं। शलाकाएँ प्रकाश व अन्धकार में भेद करती हैं, जबकि शंकु रंगों का ज्ञान कराते हैं।

(ii) द्विध्रुवीय न्यूरॉन का स्तर - इसकी तन्त्रिका कोशिकाएँ दृष्टि शलाकाओं एवं शंकुओं के स्तर को गुच्छकीय कोशिकाओं के स्तर से जोड़ती हैं।

(iii) गुच्छकीय कोशिकाओं का स्तर - इसकी कोशिकाओं के एक्सॉन तन्तु मिलकर दृक् तन्त्रिका बनाते हैं। दृक् तन्त्रिका जिस स्थान से रेटिना से निकलती है, उसे अन्ध बिन्दु कहते हैं, इस स्थान पर प्रतिबिम्ब का निर्माण नहीं होता है।

नेत्र की मध्य अनुलम्ब अक्ष पर स्थित रेटिना के मध्य भाग को मध्य क्षेत्र कहते हैं। इस भाग को पीत बिन्दु या मैकुला ल्यूटिया भी कहते हैं। यहाँ उपस्थित एक छोटे से गड्ढे को फोविया सेन्ट्रैलिस कहते हैं। इस स्थान पर सबसे स्पष्ट प्रतिबिम्ब बनता है।
लेन्स - यह उभयोत्तल, पारदर्शी, रंगहीन व लचीला होता है। यह आइरिस के ठीक पीछे स्थित होता है। लेन्स साधक स्नायु द्वारा सीलियरी कार्य से जुड़ा होता है।

तेजो वेश्म या ऐक्वस वेश्म - कॉर्निया तथा लेन्स के बीच का स्थान होता है। इसमें जलीय तरल तेजोजल या ऐक्वस ह्यूमर भरा रहता है।

काचाभ वेश्म या विट्रियस वेश्म - रेटिना व लेन्स के बीच को स्थान है। इसमें जैली सदृश काचाभ जल या विट्रियस ह्यूमर भरा रहता है। जलीय तेजोजल तथा जैली सदृश काचाभ जल सीलियरी कार्य द्वारा स्रावित होते हैं। ये नेत्र की गुहा में निश्चित दबाव बनाए रखते हैं जिससे दृष्टिपटल व अन्य नेत्रपटल यथास्थान बने रहें।

पलक - नेत्र कोटर के ऊपरी व निचले भागों में त्वचा के पेशीयुक्त भंज पलकों का निर्माण करते हैं। दोनों पलकें सचल होती हैं तथा नेत्र गोलक के खुले भाग को ढक सकती हैं। पलकों की भीतरी उपचर्म पारदर्शी होकर कॉर्निया के साथ समेकित हो जाती है। इसे

नेत्र श्लेष्मा या कन्जंक्टिवा - कहते हैं। पलकों पर बरौनियाँ पाई जाती हैं। खरगोश तथा अन्य स्तनियों में एक तीसरी पलक होती है, जिसे निमेषक पटल कहते हैं। यह पलक नेत्रों की सुरक्षा का कार्य करती है। मनुष्य में यह अवशेषी होती है।

अश्रु ग्रन्थियाँ - प्रत्येक नेत्र के बाहरी ऊपरी कोने पर तीन अश्रु ग्रन्थियाँ स्थित होती हैं। इनका स्राव कॉर्निया व कन्जंक्टिवा को नम तथा स्वच्छ बनाए रखता है। नेत्र के भीतरी कोण पर एक अश्रु नलिका होती है जो फालतू स्राव को नासा वेश्म में पहुँचा देती है। जन्म के चार माह पश्चात् मानव शिशु में अश्रु ग्रन्थियाँ सक्रिय होती हैं।

मीबोमियन ग्रन्थियाँ - ये पलकों में स्थित होती हैं तथा एक तैलीय पदार्थ का स्रावण करती हैं। यह तैलीय पदार्थ कॉर्निया पर फैलकर अश्रु ग्रन्थियों के स्रावण को पूरी कॉर्निया पर फैलाता है।

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संवेदीक अभिग्रहण एवं संसाधन - नेत्र
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नेत्र


निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए -

रेटिना


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देखने की प्रक्रिया


आप किस प्रकार किसी वस्तु के रंग का पता लगाते हैं?


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कशेरुकी के नेत्र का वह भाग जहाँ से दृक तन्त्रिका रेटिना से बाहर निकलती है, क्या कहलाता है?


निम्न में भेद स्पष्ट कीजिए -

एक्विअस ह्युमर (नेत्रोद) एवं विट्रियस ह्युमर (काचाभ द्रव)


निम्न में भेद स्पष्ट कीजिए -

अंध बिंदु एवं पीत बिंदु


निम्न के बीच में अंतर बताइए -

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