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निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: बुद्धि, मनीषा, मति, आशा, चिंता तेरे हैं कितने नाम! अरी पाप है तू, जा, चल जा यहाँ नहीं कुछ तेरा काम। - Hindi [हिंदी]

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

बुद्धि, मनीषा, मति, आशा, चिंता तेरे हैं कितने नाम!
अरी पाप है तू, जा, चल जा यहाँ नहीं कुछ तेरा काम।
विस्मृत आ, अवसाद घेर ले, नीरवते! बस चुप कर दे,
चेतनता चल जा, जड़ता से आज शून्य मेरा भर दे।'”
“चिंता करता हूँ मैं जितनी उस अतीत की, उस सुख की, 
उतनी ही अनंत में बनती जातीं रेखाएँ दुख की।
अरे अमरता के चमकीले पुतलो! तेरे वे जयनाद
काँप रहे हैं आज प्रतिध्वनि बनकर मानो दीन; विषाद।

(1) संजाल पूर्ण कीजिए:   2

(2)

  1. निम्नलिखित शब्दों के लिए विलोम शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:   1
    1. हर्ष × -----------
    2. जड़ता × -----------
  2. निर्देशानुसार कृति कीजिए:   1
    उपसर्गयुक्त शब्द   मूल शब्द   प्रत्यययुक्त शब्द
    -------------- पाप --------------

(3) पदयांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   2

Comprehension
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Solution

(1)

(2)

    1. हर्ष × विषाद
    2. जड़ता × चेतना

  1. उपसर्गयुक्त शब्द   मूल शब्द   प्रत्यययुक्त शब्द
    निष्पाप पाप पापी

(3) महाकवि जयशंकर प्रसाद जी के अनुसार, मनु महाराज और उनकी जाति स्वर्ग के सुख-वैभव में मग्न थे, जिससे प्रलय आया; अब उनका अतीत याद करने से दुःख और भय बढ़ता है, और गौरव की प्रतिध्वनि दुखद हो गई है।

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