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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए:
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कार्तिक आया नहीं कि बालगोबिन भगत की प्रभातियाँ शुरू हुईं, जो फागुन तक चला करतीं। इन दिनों वह सबेरे ही उठते। न जाने किस वक्त जगकर वह नदी-स्नान को जाते-गाँव से दो मील दूर। वहाँ से नहा-धोकर लौटते और गाँव के बाहर ही, पोखरे के ऊँचे भिंडे पर, अपनी खँँजड़ी लेकर जा बैठते और अपने गाने टेरने लगते। मैं शुरू से ही देर तक सोनेवाला हूँ, किंतु, एक दिन, माघ की उस दाँत किटकिटाने वाली भोर में भी, उनका संगीत मुझे पोखरे पर ले गया था। अभी आसमान के तारों के दीपक बुझे नहीं थे। हाँ, पूरब में लोही लग गई थी जिसकी लालिमा को शुक्र तारा और बढ़ा रहा था। खेत, बगीचा, घर-सब पर कुहासा छा रहा था। सारा वातावरण अजीब रहस्य से आवृत्त मालूम पड़ता था। उस रहस्यमय वातावरण में एक कुश की चटाई पर पूरब मुँह, काली कमली ओढ़े, बालगोबिन भगत अपनी खँजड़ी लिए बैठे थे। उनके मुँह से शब्दों का ताँता लगा था। उनकी अँगुलियाँ खँजड़ी पर लगातार चल रही थीं। गाते-गाते इतने मस्त हो जाते, इतने सुरूर में आते, उत्तेजित हो उठते कि मालूम होता,अब खड़े हो जाएँगे। कमली तो बार-बार सिर से नीचे सरक जाती। मैं जाड़े से कँंपकँपा रहा था। किंतु तारे की छाँव में भी उनके मस्तक के श्रमबिंदु, जब-तब, चमक ही पड़ते। |
- प्रभातियाँ किस समय गाया जाने वाला गीत है?
- भोर
- संध्या
- मध्याह्न
- अपराह्न
- 'उनके मुँह से शब्दों का ताँता लगा था।' -का आशय है:
- वह एक के बाद एक गीत गाए जा रहे थे।
- वह लगातार प्रवचन दिए जा रहे थे।
- वह लगातार लोगों को आशीर्वचन दे रहे थे।
- वह किसी से लगातार बातें किए जा रहे थे।
- गद्यांश में किस ऋतु का उल्लेख है?
- वसंत ऋतु
- ग्रीष्म ऋतु
- शीत ऋतु
- वर्षा ऋतु
- बालगोबिन की प्रभातियाँ कब तक चला करती थीं?
- फाल्गुन से कार्तिक तक
- कार्तिक से फाल्गुन तक
- फाल्गुन से आषाढ़ तक
- कार्तिक से चैत्र तक
- भगत गाँव के बाहर पोखरे के ऊँचे भिंडे पर क्यों गाया करते थे? अनुपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए:
- शांत और प्राकृतिक वातावरण के कारण।
- ताकि गाँववाले को परेशानी न हो।
- गाँव में अधिक शोर की मनाही थी।
- उन्हें उस स्थान पर रोज गाने की आदत थी।
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Solution
- भोर
- वह एक के बाद एक गीत गाए जा रहे थे।
- शीत ऋतु
- कार्तिक से फाल्गुन तक
- गाँव में अधिक शोर की मनाही थी।
