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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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आपके दो पत्र मिले। मैं शीघ्र उत्तर न दे सका। पिछले दिनों मैं कोलकाता गया था। भारतीय भाषा परिषद के निमंत्रण पर। वहाँ कुछ बहुत पुराने मित्रों से मुलाकात हुई। लोगों के अतिथि सत्कार और स्नेह-सद्भावना से बहुत अधिक अभिभूत हुआ। इस बार काफी लंबी अवधि बाद कोलकाता जाना हुआ...... मैं बहुत उत्सुकता से अपने इस प्रिय शहर को पुनः देखने की प्रतीक्षा कर रहा था। कोलकाता से अधिक स्मरणीय और किंचित उदास स्मृति शांतिनिकेतन की है, जहाँ पहली बार जाने का मौका मिला। रवींद्रनाथ का घर...... या बहुत से घर, जहाँ वह समय-समय पर रहते थे, देखते हुए लगता रहा, जैसे उनकी आत्मा अभी तक वहाँ कहीं आस-पास भटक रही हो। मैंने बहुत से दिवंगत लेखकों के गृह स्थान यूरोप में देखे थे, लेकिन शांतिनिकेतन का अनुभव कुछ अनूठा था...जैसे किसी की अनुपस्थिति वहाँ हर पेड़, घड़ी, पत्थर पर बिछी हो। मैंने वे सब पेड़ हाथों से छुए जिन्हें गुरदेव रवि बाबू ने खुद रोपा था और जिनके नामों का उल्लेख कितनी बार उनके गीतों में सुना था। एक दिन हम शांतिनिकेतन से कुछ दूर उस ग्राम्य प्रदेश को देखने भी गए, जहाँ पावा नदी बहती है...... संथालों की रम्य झोंपड़ियाँ, शाल के खेत और पेड़ों से घिरे पोखर-सबको देखकर अनायास शरत बाबू के बहुत पुराने उपन्यासों का परिवेश याद हो आया, जिन्हें कभी बचपन में पढ़ा था। पश्चिमी बंगाल का प्राकृतिक सौंदर्य भारत के अन्य प्रदेशों से बहुत अलग है। कहते हैं, मानसून के दिनों में वह और भी अधिक रमणीय हो जाता है। |
(1) कृति पूर्ण कीजिए: 2

(2) उत्तर लिखिए: 2
- बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य की विशेषता - ........
- गुरुदेव को पुराने मित्र मिले वह स्थान - ........
(3) ‘मानव जीवन में प्रकृति का स्थान’ विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 3
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Solution
(1)

(2)
- बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य की विशेषता - बंगाल का प्राकृतिक सौंदर्य मानसून के दिनों में अधिक रमणीय हो जाता है।
- गुरुदेव को पुराने मित्र मिले वह स्थान - भारतीय भाषा परिषद।
(3)
प्रकृति हमारी जननी है और हम उसके संतान हैं। प्रकृति ही हमारे जीवन का मूल आधार है, क्योंकि हमारा अस्तित्व उसी पर निर्भर करता है। वह हमें वायु, जल, भोजन, आवास और जीवन की सभी आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करती है। कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन और पर्यटन जैसे अनेक व्यवसाय प्रकृति पर आधारित हैं। हमारे जीवन में प्रकृति का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत है। प्रकृति के सान्निध्य में रहने से हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वेद-शास्त्र, योग और आयुर्वेद का ज्ञान प्रकृति की गोद में रहकर ही प्राप्त किया और दिया। प्रकृति को हानि पहुँचाना स्वयं के विनाश के समान है। इसलिए प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।
