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निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए: व्यथित है मेरा हृदय प्रदेश, चलूँ उसको बहलाऊँ आज। बताकर अपना सुख-दुख उसे, हृदय का भार हटाऊँ आज।। - Hindi

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Question

निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:

व्यथित है मेरा हृदय प्रदेश,
चलूँ उसको बहलाऊँ आज।
बताकर अपना सुख-दुख उसे,
हृदय का भार हटाऊँ आज।।

          चलूँ माँ के पद-पंकज पकड़,
          नयन जल से नहलाऊँ आज।
          मातृ-मंदिर में मैंने कहा.....
          चलूँ दर्शन कर आउँ आज।।

मातृ मंदिर की ओर - श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान

Maatri Mandir Ki Or - Shrimati Subhadra Kumari Chauhan

  1. ‘व्यधित’ शब्द का अर्थ लिखकर बताइए कि यहाँ किसका हृदय व्यधित हैं?  [2]
  2. कवयित्री अपना सुख-दुख किसके साथ साझा करना चाहती हैं और किस प्रकार?  [2]
  3. कविता के आधार पर बताइए कि मातृ मंदिर का मार्ग दुर्गम किस प्रकार है? उसे पार करने हेतु कवयित्री किससे सहायता की प्रार्थना करती हैं?  [3]
  4. कविता का मूल-भाव बताते हुए इसमें निहित संदेश लिखिए।  [3]
Comprehension
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Solution

  1. ‘व्यथित’ शब्द का अर्थ दुखी, व्याकुल, चिंतित या पीड़ित होता है। यह मन की पीड़ा और भावनात्मक अस्थिरता को दर्शाता है। इस कविता में कवयित्री का हृदय इसी प्रकार की व्यथा से भरा हुआ है।
  2. कवयित्री माँ अर्थात मातृभूमि के साथ अपने सुख-दुख को साझा करना चाहती है। वह अपने हृदय की पीड़ा माँ के चरणों में समर्पित कर उसे हल्का करना चाहती है। अपनी भावनाओं को व्यक्त कर वह मन का भार कम करना और माँ से सांत्वना प्राप्त करना चाहती है।
  3. सुभद्रा कुमारी चौहान की इस कविता में ‘मातृ मंदिर’ मातृभूमि, यानी भारत माता की सेवा और स्वतंत्रता के पथ का प्रतीक है। कवयित्री के अनुसार यह मार्ग कठिन है क्योंकि
    • इसमें संघर्ष और बलिदान की राह है, जहाँ अनेक कठिनाइयाँ आती हैं।
    • मातृभूमि की सेवा में त्याग, समर्पण और धैर्य आवश्यक होते हैं।
    • देश को स्वतंत्र और समृद्ध बनाने के लिए त्याग और आत्मबलिदान करना पड़ता है।
    • इसलिए कवयित्री इस कठिन मार्ग पर चलने हेतु माँ और ईश्वर से सहायता और आशीर्वाद की कामना करती है।
  4. यह कविता देशभक्ति, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सेवा और त्याग का संदेश देती है। कवयित्री अपनी भावनाओं को माँ के चरणों में अर्पित करने की बात कहकर यह स्पष्ट करती है कि सच्ची भक्ति और शांति मातृभूमि की सेवा और उसके प्रति प्रेम में ही निहित है।
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