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Question
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 60 से 70 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
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एक सज्जन - गुणवान पुत्र का बुरी संगति में फँंसना - उपदेश व्यर्थ जाना - एक दिन पुत्र को लेकर बाजार जाना - आम की टोकरी खरीदना - टोकरी में एक सड़ा हुआ आम रखवाना - दूसरे दिन बेटे से टोकरी खुलवाना - सारे आम सड़े हुए पाना - पुत्र को समझाना - उसकी आँखें खुलना - । |
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Solution
बुरी संगति का फल
एक शहर में एक अत्यंत विद्वान और सज्जन व्यक्ति रहते थे। उनका पुत्र स्वभाव से बहुत गुणवान था, लेकिन विद्यालय बदलते ही वह कुछ गलत लड़कों की बुरी संगति में पड़ गया। धीरे-धीरे उसकी आदतें बिगड़ने लगीं। पिता ने उसे बहुत समझाया और कई उपदेश दिए, लेकिन पुत्र पर उनका कोई असर नहीं हुआ; वह अपनी मनमानी करता रहा।
पुत्र को सही राह पर लाने के लिए पिता ने एक युक्ति सोची। एक दिन वे अपने पुत्र को साथ लेकर बाज़ार गए। वहाँ उन्होंने ताजे और रसीले आमों की एक टोकरी खरीदी। घर लौटते समय पिता ने जानबूझकर एक सड़ा हुआ आम भी खरीदा। घर पहुँचकर उन्होंने पुत्र से कहा, ‘बेटा, इस सड़े हुए आम को भी ताजे आमों की टोकरी में रख दो।’ पुत्र ने बिना सोचे-समझे वैसा ही किया।
अगले दिन पिता ने पुत्र को बुलाया और टोकरी खोलने के लिए कहा। जैसे ही पुत्र ने टोकरी खोली, वह हैरान रह गया। उस एक सड़े हुए आम के कारण सारे आम सड़ चुके थे और उनसे दुर्गंध आ रही थी।
पिता ने पुत्र के कंधे पर हाथ रखकर प्रेमपूर्वक समझाया, “बेटा, जिस तरह एक सड़ा हुआ आम पूरी टोकरी के अच्छे आमों को खराब कर सकता है, ठीक उसी तरह एक बुरा मित्र तुम्हारे सभी गुणों और चरित्र को नष्ट कर सकता है।” पिता की यह बात पुत्र के दिल को छू गई। उसकी आँखें खुल गईं और उसने उसी क्षण बुरी संगति छोड़ने का संकल्प लिया।
सीख: कुसंगति का अंत सदैव पतन और विनाशकारी होता है; इसलिए हमेशा अच्छे मित्रों का चुनाव करना चाहिए।
