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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए: एक उथला तालाब मछलियों से भरपूर था। - Hindi

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Question

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए:

       एक उथला तालाब मछलियों से भरपूर था। उसमें तीन विशालकाय मछलियाँ भी रहती थीं, जो पक्की सखियाँ थी। इनमें पहले वाली मछली दूरदर्शी एवं दीर्घकाल की बात सोचने वाली थी, दूसरे की प्रतिभा ठीक समय पर काम करने वाली थी, परंतु तीसरी मछली आलसी और प्रत्येक काम को देरी से करने वाली थी। एक दिन कुछ मछुवारों ने इस कम गहराई वाले तालाब से पानी की छोटी-बड़ी नालियाँ बनाकर नीचे वाली भूमि की ओर प्रवाहित करना प्रारंभ कर दिया, ताकि पानी कम होने से वे सुगमता से वहाँ की मछलियाँ तथा दूसरे जल-जीवों को पकड़ सकें।

       सरोवर के घटते जलस्तर को देखकर दूरदर्शी मछली ने अपनी दोनों सखियों से कहा- “सखियो! ऐसा जान पड़ता है कि हमारे ऊपर संकट के बादल घिरने लगे हैं। जब तालाब का पानी कम हो जाएगा तो मछुआरे हमें शेष मछलियों के साथ आसानी से पकड़ सकते हैं अत: हमें जलाशय का पानी कम होने से पूर्व ही किसी अन्य सरोवर में पहुँचने का मार्ग ढूँढना चाहिए। बुद्धिमान वही है जो आने वाले संकट को पहले से ही अपनी नीति द्वारा मिटा देता है।” इस पर साधारण बुद्धि वाली मछली कहने लगी- “हे सखियों! तुम्हारी बात सर्वथा उचित है, परन्तु मेरे विचारानुसार हमें अभी तालाब छोड़ने की शीघ्रता नहीं करनी चाहिए।” उसी समय तीसरी मछली अपनी सखियों से कहने लगी- “जब मेरे ऊपर संकट आएगा तो उसी समय मैं अपने बचाव का उपाय करूँगी। अभी तो मैं जी भरकर अन्य छोटे जीवों तथा मछलियों को खाकर आराम से सोना चाहती हूँ। बाद में जो होगा देखा जाएगा।”

       जब तीनों सखियाँ संकट की इस घड़ी में भी एक मत नहीं हो सकीं तो परम बुद्धिमान दूरदर्शी मछली रात को ही वहाँ से पानी की नालियों द्वारा निकलकर किसी दूसरे गहरे जलाशय में चली गई। कुछ समय पश्चात मछुआरों ने देखा कि तालाब का सारा पानी लगभग बाहर निकल चुका है तो उन्होंने अपना जाल बिछाकर अनेक मछलियों सहित दोनों मछलियों को भी उसमें फँसा लिया। दूसरी मछली जब जाल में फँस गयी तो उसने जान बूझकर अपनी श्वास रोक ली तथा निश्चल होकर मरने का ढोंग करने लगी। जब मछुआरों ने देखा कि वह मछली तो मर चुकी है, तो उन्होंने उसे अपने जाल से निकालकर फेंक दिया। वह किसी तरह घिसटती हुई एक जलाशय में समा गई और इस प्रकार उसने अपने प्राणों की रक्षा की। परंतु आलसी तथा मूर्ख तीसरी मछली भाग्य पर भरोसा करती हुई जाल में फँसी तड़पती रही। मुसीबत के समय उसे अपनी मृत्यु को निकट आते देख कुछ भी सूझ नहीं रहा था। मछुआरों ने आते ही अन्य मछलियों के साथ उसे भी जाल से निकाला और उसे उठाकर बाज़ार में बेचने के लिए चल पड़े।

       ऋषियों तथा विद्वानों ने धर्म शास्त्रों में लिखा है जो प्राणी संकट आने से पहले ही अपने बचाव के लिए उपाय सोचे उसे दूरदर्शी और जो ठीक समय आने पर आत्मरक्षा के बारे में विचार करे उसे साधारण बुद्धि कहा जाता है। एक अन्य प्रकार का जीव भी होता है जिसे दीर्घसूत्री कहा जाता है। ऐसा व्यक्ति अपने आलस्य के कारण घोर संकट को प्राप्त करता है।

       जो व्यक्ति सोच समझकर सावधान होकर कार्य करता है वह निश्चय ही अपनी इच्छानुसार फल प्राप्त करता है। कार्य को भविष्य पर छोड़ने वाला व्यक्ति जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। सच है ‘आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।’

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर यथासंभव अपने शब्दों में लिखिए:

  1. तीनों मछलियाँ कहाँ रहती थी ? प्रत्येक की विशेषता बताइए।  [2]
  2. मछुआरों ने जलाशय के जल को किस ओर प्रवाहित कर दिया और क्यों?  [2]
  3. दूरदर्शी मछली ने अपनी दोनों सखियों को कया सलाह दी ? क्या उन्होंने उसकी बात मानी ?स्पष्ट कीजिए।  [2]
  4. पहली और दूसरी मछली ने अपनी जान कैसे बचायी?  [2]
  5. तीसरी मछली को किस संकट का सामना करना पड़ा ? प्रस्तुत गद्यांश में निहित संदेश भी लिखिए।  [2]
Very Long Answer
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Solution

  1. तीनों मछलियाँ एक ही तालाब में रहती थीं। पहली मछली बुद्धिमान थी, दूसरी सामान्य समझ वाली थी और तीसरी आलसी व लापरवाह स्वभाव की थी।
  2. मछुआरों ने तालाब का पानी पास की निचली भूमि की ओर मोड़ दिया, ताकि जल स्तर घटने पर वे वहाँ मौजूद मछलियों और अन्य जलजीवों को आसानी से पकड़ सकें।
  3. समझदार मछली ने अपनी दोनों साथिनों को सुझाव दिया कि जल स्तर कम होने से पहले ही किसी अन्य जलस्रोत तक पहुँचने का रास्ता खोज लेना चाहिए, परंतु उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
  4. पहली मछली समय रहते तालाब छोड़कर दूसरे जलाशय में चली गई, जबकि दूसरी मछली ने अपनी चतुराई से मरने का नाटक किया। इस प्रकार दोनों ने अपनी जान बचा ली।
  5. तीसरी मछली को अपने आलस्य के कारण प्राण संकट का सामना करना पड़ा। इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को समझदार और कर्मठ होना चाहिए, न कि आलसी।
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