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Question
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
| मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है, आत्मनिर्भरता तथा सबसे बड़ा अवगुण है, स्वावलंबन का अभाव। स्वावलंबन सबके लिए अनिवार्य है। जीवन के मार्ग में अनेक बाधाएँ आती हैं। यदि उनके कारण हम निराश हो जाएँ, संघर्ष से जी चुराएँ या मेहनत से दूर रहें तो भला हम जीवन में सफल कैसे होंगे? अतः आवश्यक है कि हम स्वावलंबी बनें तथा अपने आत्मविश्वास को जाग्रत करके मजबूत बनें। यदि व्यक्ति स्वयं में आत्मविश्वास जाग्रत कर ले तो दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं है जिसे वह न कर सके। स्वयं में विश्वास करने वाला व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में कामयाब होता जाता है। सफलता स्वावलंबी मनुष्य के पैर छूती है। आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता से आत्मबल मिलता है जिससे आत्मा का विकास होता है तथा मनुष्य श्रेष्ठ कार्यों की ओर प्रवृत्त होता है। स्वावलंबन मानव में गुणों की प्रतिष्ठा करता है। आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, आत्मबल, आत्मरक्षा, साहस, संतोष, धैर्य आदि गुण स्वावलंबन के सहोदर हैं। स्वावलंबन व्यक्ति, राष्ट्र तथा मानव मात्र के जीवन में सर्वांगीण सफलता प्राप्ति का महामंत्र है। |
(क) जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कौन-सा गुण आवश्यक है और क्यों? [2]
(ख) आत्मविश्वास क्यों आवश्यक है और कैसे जाग्रत हो सकता है? [2]
(ग) स्वावलंबन का सहोदर किसे कहा गया है और क्यों? [2]
(घ) स्वावलंबन का अभाव मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण क्यों है? [2]
(ङ) ‘आत्मबल’ के लिए क्या आवश्यक है? [1]
(च) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए। [1]
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Solution
(क) जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का गुण होना चाहिए, क्योंकि इन दो गुणों से आप जीवन में आने वाली चुनौतियों और निराशा का सामना कर सकते हैं।
(ख) आत्मविश्वास से आत्मबल मिलता है, जो जीवन में सभी काम करने के लिए आवश्यक है, और यह सिर्फ कड़ी मेहनत से प्राप्त होता है।
(ग) हम आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, आत्मबल, आत्मरक्षा, संतोष और धैर्य का उपयोग करके स्वावलंबी बनते हैं।
(घ) स्वावलंबन का अभाव मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण है क्योंकि इससे वह जीवन में सफल नहीं हो सकता और हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता है।
(ङ) आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता, आत्मबल के लिए आवश्यक है।
(च) “सफलता के महामंत्र” / “स्वावलम्बन”
