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Question
निम्नलिखित अवतरण को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
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‘चली गई। ऐसा मैं नहीं सुन सकूँगी। जो मुझे करना है वह सामली सुन भी न सकेगी। भवानी तुमने मेरे हृदय को कैसा कष्ट दिया? मुझे बल दो कि मैं राजवंश की रक्षा में अपना रक्त दे सकूँ।’ दीपदान - डॉ. रामकुमार वर्मा Deepdan - Dr. Ram Kumar Verma |
- यहाँ किस राजवंश की बात की जा रही है? उस पर कौनसा संकट आया था? [2]
- वक्ता क्या करना चाहता था तथा क्यों करना चाहता था? [2]
- राजवंश की रक्षा किसने किस प्रकार की? वर्णन कीजिए। [3]
- “दीपदान” का अर्थ क्या है? एकांकीकार ने ‘दीपदान’ से क्या संदेश देना चाहा है? [3]
Comprehension
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Solution
- यहाँ चित्तौड़ के राजवंश का उल्लेख किया गया है। चित्तौड़ राजघराने में महाराणा सांगा के सबसे छोटे पुत्र कुँवर उदय सिंह राज्य के उत्तराधिकारी थे। इसी समय उनके जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया था।
- इस कथन में वक्ता अपने पुत्र का बलिदान देने का दृढ़ निश्चय व्यक्त कर रही है। वह राजवंश की रक्षा के लिए ऐसा करना चाहती है, क्योंकि उसे अपनी मातृभूमि और वंश की सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया था।
- राजवंश की रक्षा वीरांगना पन्ना धाय ने की। पन्ना धाय महाराणा सांगा के छोटे पुत्र कुँवर उदय सिंह की धाय माँ थीं। अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय उन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए कुँवर उदय सिंह को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
- इस एकांकी में ‘दीपदान’ त्याग, आत्मसमर्पण और बलिदान का प्रतीक है। एकांकी में वीरांगना पन्ना धाय द्वारा प्रस्तुत त्याग और बलिदान की भावना अत्यंत प्रभावशाली रूप में दिखाई गई है। उन्होंने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर कुँवर उदय सिंह की रक्षा की। इस माध्यम से एकांकीकार कर्तव्यनिष्ठा, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम का संदेश देता है तथा यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रप्रेम पारिवारिक मोह से भी ऊपर होता है।
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