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निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: यों हमारी पूरी दार्शनिक ट्रेनिंग देह के खिलाफ जाती हैं। देह की सेवा बड़ी हीन बात मानी गई हैं। - Hindi [हिंदी]

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Question

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

यों हमारी पूरी दार्शनिक ट्रेनिंग देह के खिलाफ जाती हैं। देह की सेवा बड़ी हीन बात मानी गई हैं। दो-तीन साल पहले एक मठाधीश स्वामीजी ने हमें यह अच्छी तरह समझा दी थी। वे अच्छे पुष्ट और गौरवर्ण संन्यासी थे।

तख्त पर बैठे थे और देह की तुच्छता पर ऐसा जोरदार प्रवचन कर रहे थे कि हमें अपने शरीर से घृणा होने लगी थी। अच्छे उपदेशक थे, जो अच्छी-से-अच्छी चीज के प्रति नफरत पैदा कर देते हैं। वे कह रहे थे- “यह मलमूत्र की खान, यह गंदा शरीर मिथ्या है, नाशवान है, क्षणभंगुर है। मूरख इसे स्वादिष्ट पकवान खिलाते हैं, इसे सजाते हैं इसपर इत्र चुपड़ते हैं, वे भूल जाते हैं कि एक दिन यह देह मिट्टी में मिलेगी और इसे कीड़े खाएँगे।” इतने में एक सेवक केसरिया रबड़ी का गिलास लाया और स्वामीजी ने उसे गटक लिया।

 (1) संजाल पूर्ण कीजिए: 2

(2) जोड़ियाँ मिलाइए: 2

उत्तर
(i) संन्यासी ______ मिट्टी में मिलेगी 
(ii) देह ______ पापी
(iii) मन ______ केसरिया रबड़ी
(iv) गिलास ______ पुष्ट और गौरवर्ण

(3) ‘कुसंगति का फल बुरा होता है।’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। 2

Comprehension
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Solution

 (1) 

(2) 

(i) संन्यासी पुष्ट और गौरवर्ण 
(ii) देह मिट्टी में मिलेगी 
(iii) मन पापी
(iv) गिलास केसरिया रबड़ी

(3) 

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे जीवन में किसी न किसी साथी की आवश्यकता होती है। संगति का प्रभाव मनुष्य के जीवन पर गहरा पड़ता है और वही उसके भविष्य को बदल देती है। जैसे धुआँ कुसंगति में पड़कर कालिख बन जाता है, जबकि सुसंगति से वही स्याही बनकर ग्रंथों की रचना में उपयोगी हो जाता है। धूल पानी के साथ मिलकर कीचड़ बनती है, लेकिन हवा के साथ उड़कर राजा के मुकुट पर भी पहुँच सकती है। स्वाती की बूँद सीप में जाकर मोती बन जाती है और साँप के मुख में जाकर विष बन जाती है। इसी प्रकार अच्छी संगति से मनुष्य का चरित्र सुधरता है, बुद्धि विकसित होती है और मन पवित्र बनता है। दूसरी ओर, बुरी संगति अत्यंत हानिकारक होती है, क्योंकि दुर्जनों का साथ कदम-कदम पर नुकसान, अपमान और बदनामी देता है। इसलिए हमें हमेशा कुसंगति से दूर रहना चाहिए। जैसा कि कहा गया है, “जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन।”

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