English

निम्न विषय पर निबन्ध लिखिए जो 300-350 शब्दों से कम न हो: ‘व्यक्ति की उन्नति में संस्कारों, शिक्षा एवं सामाजिक परिवेश का योगदान होता है।’ इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। - Hindi (Indian Languages)

Advertisements
Advertisements

Question

निम्न विषय पर निबन्ध लिखिए जो 300-350 शब्दों से कम न हो:

‘व्यक्ति की उन्नति में संस्कारों, शिक्षा एवं सामाजिक परिवेश का योगदान होता है।’ इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

Writing Skills
Advertisements

Solution

निस्संदेह यह सत्य है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन के निर्माण में उसकी संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक परिवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संस्कृति व्यक्ति के संस्कारों एवं जीवन-मूल्यों का आधार होती है। व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में संस्कारों का विशेष महत्व होता है। चरित्रवान व्यक्ति वही कहलाता है जो अच्छे संस्कारों को अपने जीवन में अपनाकर चलता है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और सामाजिक शिक्षाओं में भी संस्कारों की गरिमा का स्पष्ट वर्णन किया गया है। बचपन में प्राप्त संस्कार व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करते हैं और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

संस्कार केवल जन्म से ही नहीं मिलते, बल्कि उन्हें परिवार, समाज और शिक्षा के माध्यम से विकसित किया जाता है। संस्कारों से युक्त व्यक्ति कभी भी दूसरों को हानि नहीं पहुँचाता, बल्कि वह सदैव ईश्वर में आस्था रखता है और मानव सेवा को अपना कर्तव्य मानता है। अच्छे संस्कारों से युक्त और शिक्षित व्यक्ति समाज का उत्तरदायी नागरिक बनता है। वह अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करता है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को विवेकशील, नैतिक और संवेदनशील बनाना भी है। अनुकूल सामाजिक वातावरण व्यक्ति के विचारों और व्यवहार को सकारात्मक दिशा देता है। ऐसा व्यक्ति सदैव सत्य, अहिंसा, करुणा और सहयोग जैसे मूल्यों का पालन करता है। संस्कारयुक्त व्यक्ति अपने आचरण से समाज में आदर्श प्रस्तुत करता है और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बनता है।

इतिहास में अनेक महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके जीवन में संस्कारों का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है। स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, बुद्ध, चाणक्य, सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने अपने संस्कारों, शिक्षा और नैतिक मूल्यों के बल पर समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने न केवल स्वयं उन्नति की, बल्कि समाज और देश के उत्थान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस प्रकार स्पष्ट है कि व्यक्ति का समग्र विकास तभी संभव है जब वह शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान भी हो। शिक्षित, संस्कारयुक्त और सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्ति ही राष्ट्र के सशक्त निर्माण में सहायक सिद्ध होता है।

shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
2021-2022 (March) Official Board Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×