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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :

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Question

निम्‍नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हों :

विख्यात गणितज्ञ सी.वी. रमण ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सकि्‍का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।           
      रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था । उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए । वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके । रमण को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसद्धि लॉर्डरेले के नबिंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज नकिाला । यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमण की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की । अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमण से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा । रमण ने लेख लिखकर श्री जोन्स को दिया, पर जोन्स उसे जल्‍दी लौटा न सके । कारण संभवतः यह था कि वह उसे पूरी तरह आत्‍मसात न कर सके ।

प्रश्न :

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______
  5. ______
Short/Brief Note
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Solution

  1. किसने छात्रावस्था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा लिया था?
  2. रमण का एक साथी किस संबंध में प्रयोग कर रहा था?
  3. अपने साथी की समस्या का हल निकालने के लिए रमण ने किसके निबंध पढ़े?
  4. किसने रमण को लेख लिखने के लिए कहा?
  5. रमण के लेख को अध्यापक जोन्स क्यों जल्दी नहीं लौटा सके?
shaalaa.com
गद्‍य आकलन
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Chapter 2.09: जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ - उपयोजित लेखन [Page 88]

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Balbharati Hindi Lokbharati Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 2.09 जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
उपयोजित लेखन | Q (१) | Page 88

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

सर सी. वी. वेंकटरमन भारत के उन महान वैज्ञानिकों में से हैं, जिन्हें उनकी ‘रमन प्रभाव’ की खोज के लिए जाना जाता है। भारत रत्न सी. वी. वेंकटरमन को 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

उनका जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ। वे चंद्रशेखर अय्यर तथा पार्वती अमाल की दूसरी संतान थे। रमन के पिता गणित के प्रोफेसर थे। उनके पिता विशाखापट्टनम में ए. वी. एन. कॉलेज में नियुक्त हुए तो पूरा परिवार वहीं चला गया।

अल्पायु से ही रमन की शैक्षिक प्रतिभा सामने आने लगी। ग्यारह वर्षीय रमन ने ए. वी. एन. कॉलेज में दाखिला लिया। इसके दो वर्ष बाद ही वे मद्रास के प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ने गए। उन्होंने भौतिकी एवं अंग्रेजी में ऑनर्स के साथ बी. ए. की डिग्री हासिल की। उस समय एकेडमिक पढ़ाई में अच्छे छात्र उच्च शिक्षा पाने के लिए विदेश जाते थे। किन्तु वे गिरती सेहत की वजह से नहीं जा पाए अत: उसी कॉलेज में पढ़ते रहें और उन्होंने एम. ए. ऑनर्स की डिग्री ली।


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों:

'तविषा अपराध-बोध से भरी हुई थी। मांडवी दी से उसने अपना संशय बाँटा। चावल की टंकी में घुन हो रहे थे। उस सुबह उसने मारने के लिए डाबर की पारे की गोलियों की शीशी खोली थी चावलों में डालने के लिए । शीशी का ढक्कन मरोड़कर जैसे ही उसने ढक्कन खोलना चाहा, कुछ गोलियाँ छिटककर दूर जा गिरीं । गोलियाँ बटोर उसने टंकी में डाल दीथीं। फिर भी उसे शक है कि एकाध गोली ओने-कोने में छूट गई होगी।


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो:

व्यापार और वाणिज्य ने यातायात के साधनों को सुलभ बनाने में योग दिया है। यद्यपि यातायात के साधनों में उन्नति युद्धों के कारण भी हुई है, तथापि युद्ध स्थायी संस्था नहीं है व्यापार से रेलों, जहाजों आदि को प्रोत्साहन मिलता है और इनसे व्यापार को। व्यापार के आधार पर हमारे डाक-तार विभाग भी फले-फूले हैं। व्यापार ही देश की सभ्यता का मापदंड है। दूसरें देशों से जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, वह व्यापार के बल-भरोसे होती है। व्यापार में आयात और निर्यात दोनों ही सम्मिलित हैं। व्यापार और वाणिज्य की समृद्धि के लिए व्यापारी को अच्छा आचरण रखना बहुत आवश्यक है।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए, जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों :

एक बार भगवान बुदूध का एक प्रचारक घूम रहा था। उसे एक भिखारी मिला। वह प्रचारक उसे धर्म का उपदेश देने लगा। उस भिखारी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। उसमें उसका मन ही नहीं लगता था। प्रचारक नाराज हुआ। बुदूध के पास जाकर बोला, "वहाँ एक भिखारी बैठा है, मैं उसे इतने अच्छे-अच्छे सिखावन दे रहा था, तो भी वह सुनतां ही नहीं।" बुदूध ने कहा, "उसे मेरे पास लाओ।" यह प्रचारक उसे बुदूध के पास ले गया। भगवान बुद्ध ने उसकी दशा देखीं। उन्होंने ताड़ लिया कि भिखारी तीन-चार दिनों से भूखा है। उन्होंने उसे पेट भरकर खिलाया और कहा, “अब जाओ।'' प्रचारक ने कहा, "आपने उसे खिला तो दिया, लेकिन उपदेश कुछ भी नहीं दिया।" भगवान बुदूध ने कहा, "आज उसके लिए अन्न हीं उपदेश था। आज उसे अन्न की सबसे ज्यादा जरूरत थी। वह उसे पहले देना चाहिए। अगर वह जिएगा तो कल सुनेगा।"

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिसके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

कॉलेज के दिनों में एक बुरी लत लग गई, जो आज तक पीछा नहीं छोड़ रही है। कई बार पत्नी से बहस हो जाती है, मेरे से ज्यादा प्यारा अखबार है, जिसके साथ जब देखो, चिपके रहते हो। कया किया जाए; अखबार पढ़ने का नशा ही कुछ ऐसा है कि सुबह नहीं मिले तो लगता है कि दिन ही नहीं निकला। पढ़ी-लिखी पत्नी अखबार का महत्त्व समझती है। कभी-कभी तकरार जरूर होती है, परन्तु तकरार ही प्रेम की जननी हैं।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिसके उत्तर पद्यांश में एक-एक वाक्य में हों।

एक दिन राजा अचानक बीमार पड़ गए और उनकी तबीयत खराब होने लगी। महामंत्री ने वैद्य जी को दिखाया तो वैद्य जी कहने लगे कि राजा को अगर मैं सच बता दूँ तो वह मुझे सजा दे देगा। मंत्री ने पूछा “क्या बात है?” तब वैद्य ने कहा कि राजा शारीरिक रूप से काम नहीं करता है इसलिए बीमार रहता है। मंत्री ने राजा को इस बात की जानकारी दी। राजा अब किसान के रूप में काम करने लगा। थोड़े ही दिनों में वह स्वस्थ और प्रसन्न रहने लगा। उसने मंत्री को इस खुशी में इनाम दिया।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हों -

सफलता या असफलता जीवन के दो पहलू हैं। व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसी के अनुसार उसे फल मिलता है। मेहनतकश इंसान जीवन कों सफल बना सकता है। आलसी व्यक्ति इस पृथ्वी पर एक बोझ की तरह होता है। अत: 'व्यंक्ति को सदा कर्म पर ही ध्यान देना चाहिए। अच्छे कर्म से व्यक्ति को परम आनन्द की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति परोपकारी होते हैं। समाज में परोधकारी व्यक्ति को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर गद्यांश में एक-एक वाक्य में हो।

बसंत के आगमन के साथ ही कभी-कभी ऐसा लगता है, मानो जंगल में लाल रंग की लपटें उठ रही हों, ये लपटें आग की नहीं बल्कि पलाश के नारंगीपन लिए लाल फूलों की होती हैं। पलाश के लाल-लाल फूल आग की लपटों के समान ही दिखाई देते हैं। इसलिए इसे ‘फ्लेम ऑफ द फायर’ कहा जाता है।

पलाश भारतीय मूल का एक प्राचीन वृक्ष हैं। इसे आदिदेव ब्रह्मा और चंद्रदेव से संबंधित अलौकिक वृक्ष माना जाता है। इसमें एक ही स्थान पर तीन पत्ते होते हैं। इस पर कहावत प्रचलित है- ‘ढाक के तीन पात’। इसकी लकड़ी का हवन में उपयोग किया जाता है। इसीलिए इसे याज्ञिक भी कहते हैं। यज्ञ में काम आने वाले पात्र भी पलाश की लकड़ी से बनाए जाते हैं।


निम्‍नलिखित गद्यांश पढ़कर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर गद्यांश में एक-एक वाक्‍य में हों:

           विख्यात गणितज्ञ सी. वी. रमन ने छात्रावस्‍था में ही विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का देश में ही नहीं विदेशों में भी जमा 
लिया था।
           रमन का एक साथी छात्र ध्वनि के संबंध में कुछ प्रयोग कर रहा था। उसे कुछ कठनिाइयाँ प्रतीत हुईं, संदेह हुए। वह अपने अध्यापक जोन्स साहब के पास गया परंतु वह भी उसका संदेह निवारण न कर सके। रमन को पता चला तो उन्होंने उस समस्‍या का अध्ययन-मनन किया और इस संबंध में उस समय के प्रसिद्ध लॉर्ड रेले के निबंध पढ़े और उस समस्‍या का एक नया ही हल खोज निकाला। यह हल पहले हल से सरल और अच्छा था। लाॅर्ड रेले को इस बात का पता चला तो उन्होंने रमन की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अध्यापक जोन्स भी प्रसन्न हुए और उन्होंने रमन से इस प्रयोग के संबंध में लेख लिखने को कहा।

निम्‍नलिखित गद्यांश पर ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्‍तर एक-एक वाक्‍य में हो।

मेरा विश्वास है कि नेता गढ़े नहीं जाते। वे जन्म लेते हैं। नेता का असली लक्षण है कि वे भिन्न मतावलंबियों को आम संवेदना के जरिए इकट्ठा कर सकते हैं। यह काम स्‍वाभाविक क्षमतावश अपने आप संपन्न हो जाता है, कोशिश करके यह संभव नहीं है। पश्चिमी देश से प्रत्‍यावर्तन से कुछ पहले एक अंग्रेज मित्र ने मुझसे सवाल किया था, ‘‘स्‍वामी जी, चार वर्ष विलास की लीलाभूमि, गौरव के मुकुटधारी, महाशक्‍तिशाली पाश्चात्‍य भूमि पर भ्रमण के बाद मातृभूमि आपको कैसी लगेगी?’’
मैंने उत्‍तर दिया, ‘‘पाश्चात्‍य भूमि में आने से पहले मैं भारत से प्यार करता था। अब भारत भूमि का धूल कण तक मेरे लिए पवित्र है। भारत की वायु मेरे लिए पवित्रतायुक्‍त है। मेरे लिए वह देश अब तीर्थ-स्‍वरूप है।’’ इसके अलावा मेरे मन को अन्य कोई उत्‍तर नहीं सूझा।

गद्‌य - आकलन- (5० से ७० शब्द)

निम्नलिखित गद्यखंड पर ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों । मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। वह चाहे तो आकाश के तारों को तोड़ ले, वह चाहे तो पृथ्वी के वक्षस्थल को तोड़कर पाताल लोक में प्रवेश कर जाए, वह चाहे तो प्रकृति को खाक बनाकर उड़ा दे । उसका भविष्य उसकी मुट्ठी में है। प्रयत्न के द्वारा वह क्या नहीं कर सकता है ? यह समस्त बातें हम अतीत काल से सुनते चले आ रहे हैं और इन्हीं बातों को सोचकर कर्मरत होते हैं परंतु अचानक ही मन में यह विचार आ जाता है कि क्या हम जो कुछ करते हैं वह हमारे वश की बात नहीं है ?


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


उपयुक्त प्रश्नचार्ट:


निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सन 1911 में, सत्येंद्रनाथ ने उच्चतर माध्यमिक की विज्ञान की परीक्षा दी और प्रथम आए। मेघनाथ साहा ने ढाका कॉलेज से परीक्षा दी थी और वरीयता क्रम में वे दूसरे स्थान पर थे। निखिल रंजन सेन ने इस परीक्षा में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

सत्येन, निखिल रंजन और मेघनाथ साहा ने विज्ञान स्नातक की पढ़ाई के लिए गणित को चुना। वार्षिक परीक्षा में सत्येंद्र प्रथम आए, मेघनाथ द्वितीय और निखिल रंजन तृतीय। सन 1915 की विज्ञान स्नातकोत्तर की परीक्षा में भी ऐसा ही परिणाम आया।

जल्द ही सत्येन विश्वविद्यालय में 'चौदह चश्मों वाले लड़के' के मशहूर हो गए । वह अपना खाली समय अपने सहपाठियों और निचली कक्षाओं में पढ़ रहे मित्रों को पढ़ाने में व्यतीत करते थे। वह उन्हें हरीश सिन्हा के घर पर पढ़ाते थे। नीरेंद्रनाथ राय और दिलीप कुमार राय को इन कक्षाओं से वहुत लाभ हुआ। इसी दौरान सत्येन 'सबूज पत्र' नामक दल से सक्रिय से जुड़ गए। दल के सदस्य प्रथमा चौघरी के घर पर इकट्ठे होते थे।

(1) उत्तर लिखिए:        [2]

(2) 'ज्ञान देने से ज्ञान बढ़ता है' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।      [2]


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