Advertisements
Advertisements
Question
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | स्रग्भ्य: | चतुर्थी |
Advertisements
Solution
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| स्रजे | स्रग्भ्याम | स्रग्भ्य: | चतुर्थी |
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
सर्वं व्याप्नोति सलिलं शर्करा लवणं यथा।
एवं मानवताधर्मो धर्मान् व्याप्नोति सर्वथा।।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
भानुर्भुवनमण्डलम् = ______ + भुवनमण्डलम् ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
व्यवहरेल्लोके = ______ + लोके ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
एषोऽभ्युदयकृत् = एषः + ______।
पाठात् ल्यबन्त-अव्ययानि चित्वा लिखत
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज । (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
भानुः भुवनमण्डलं प्रकाशयति ।
(णिजन्तं निष्कासयत ।)
समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत
| 1 | सरि | (अ) | वण |
| 2 | रङ्गः | (आ) | भानुः |
| 3 | अम्भः | (इ) | नदी |
| 4 | दिनकृत् | (ई) | पन्थाः |
| 5 | मार्गः | (उ) | सलि |
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
मानवताधर्मः अभ्युदयकृत् कथं वर्तते?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
' मानवताधर्मः ' इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत ।
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ऋत्विग्भ्याम् | ______ | तृतीय |
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ मम, राजा, एतौ, साधवः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - शाखी, वयम्, पिता, ताः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ भेतव्यम्, जानाति, ददाति, मुक्तः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - याचते, श्रवणीयम्, प्रदत्तवान्, शिक्षयाति)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | योगिषु | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| धाम्ना | ______ | ______ | तृतीय |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
एकीभूय यथा सर्वे वर्णा गच्छन्ति शुक्लताम्।
तथा सम्भूय शंसन्ति धर्मा मानवतागुणम्।।
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
