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Question
' न त्वं शोचितुमर्हसि ' इति पाठस्य सारांशः मातृभाषया लेखनीयः ।
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Solution
पाठ का सारांश : इस पाठ में यह वर्णित है कि जब सिद्धार्थ महाभिनिष्क्रमण के लिए घर से निकलते हैं तब उनका सारथी जो कि उनका परम भक्त भी है, बहुत दुःखी मन से उन्हें भार्गव ऋषि के आश्रम तक पहुंचाता है। सारथी 'छन्दक' को सिद्धार्थ ने अपने राजमुकुट की चमकीली मणि दी। छंदक दुःखी हुआ। वह नहीं चाहता था कि सिद्धार्थ अभी तपोवन जाएँ। भार्गव ऋषि के आश्रम से आगे जाने से पहले उन्होंने छंदक को लौट जाने को कहा। तब वे छंदक को दु:खी न होने का उपदेश देते हैं कि तुम शोक न करो, दुःखी मत हो। राजमहल की ओर वापसी जाने को कहने से पूर्व सिद्धार्थ छंदक की प्रशंसा करते हैं।
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त्वं कीदृशं मां न शोचितुमर्हसि ?
कस्मिन् सति कस्य अकालः नास्ति ?
अधोलिखितेषु सन्धि कुरुत
त्यागात् + न
अधोलिखितेषु सन्धि कुरुत
विश्लेष: + तस्मात्
अधोलिखितेषु सन्धि कुरुत
न + अस्नेहेन
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
सुप्तः
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
दृष्ट्वा
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
भूयिष्ठम्
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
आदाय
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
विज्ञाप्य
अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्ययविभागं कुरुत -
वाच्यम्
अपोलिखितश्लोकयो हिन्दी / आइलभाषया अनुवादः कार्यः
कटावदीपकर्माण मणिमादाय भास्वरम् ।
मुवन्यापयमिदं तस्थी सादित्या इव मन्दरः ।।
अधोलिखितेषु सन्धि कुरुत
जरामरणनाशार्य प्रविष्टोऽस्मि तपोवनम् ।
न खलु स्वर्गतर्षण नास्नेहन न मन्युना ।।
न त्वं ______ अर्हसि ।
स ददर्श ______ आश्रमपदम् ।
जनीभवति भूयिष्ठम् _______ विपर्यये ।
स विस्मयनिवृत्यर्थं ______ च ।
अकालः_______ धर्मस्य ।
विशेष्य - विशेषणयोः योजनं कुरुत -
| (क) | भास्करे | (क) | अभिमुखः |
| (ख) | जनः | (ख) | भास्वरम् |
| (ग) | मणिम् | (ग) | जगच्चक्षुपि |
| (घ) | जीविते | (घ) | अभिनिष्कान्तम् |
| (ड) | माम् | (ड) | चञ्चले |
अधोलिखितपदानां विपरीतार्यकपदैः मेलनं कुरुत
| पदानि | विपरीतार्थकपदानि | ||
| (क) | सुप्तः | (क) | चञ्चलः |
| (ख) | अवतीर्य | (ख) | रंकः |
| (ग) | स्वजनः | (ग) | जागृतः |
| (घ) | नृपः | (घ) | आरुह्य |
| (ड) | ध्रुवः | (ड) | परजनः |
उदाहरणानुसार विग्रहपदानि आवृत्य समस्तपदानि रचयत-
| विग्रहपदानि | समस्तपदानि |
| न स्निग्धः | अस्निग्धः |
| आदित्येन सह | ______ |
उदाहरणानुसार विग्रहपदानि आवृत्य समस्तपदानि रचयत
| विग्रहपदानि | समस्तपदानि |
| न स्निग्धः | अस्निग्धः |
| स्वर्गाय तर्षः | ______ |
उदाहरणानुसार विग्रहपदानि आवृत्य समस्तपदानि रचयत-
| विग्रहपदानि | समस्तपदानि |
| न स्निग्धः | अस्निग्धः |
| वसुधायाः अधिपः | ______ |
