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Question
मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?
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Solution 1
मनुष्य द्वारा पीया जाने वाले पानी व शरीर द्वारा अवशोषण पर मूत्र की मात्रा निर्भर करती है। कम पानी पीने पर मूत्र की मात्रा कम होती है कुछ हार्मोन इसे अपने नियंत्रण में रखते है। यूरिया तथा यूरिक अम्ल के उत्सर्जन के लिए भी जल की मात्रा बढ़ जाती है। अत: अधिक मूत्र उत्सर्जित होता है।
Solution 2
- मूत्र की मात्रा को पिट्यूटरी ग्रंथि के पश्च खंड से स्रावित होने वाले एक हार्मोन, जिसे एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन (ADH) या वासोप्रेसिन कहा जाता है, द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस हार्मोन का कार्य नेफ्रॉन के फिल्ट्रेट से पानी के पुनः अवशोषण को बढ़ावा देना है।
- जब रक्त में पर्याप्त मात्रा में पानी होता है, तो ADH का कम स्राव होता है, जिससे नेफ्रॉन के फिल्ट्रेट से कम पानी अवशोषित होता है, और इस प्रकार अधिक मात्रा में मूत्र बनता है। इसके विपरीत, जब रक्त में पानी की कमी होती है, तो अधिक ADH स्रावित होता है, जिससे नेफ्रॉन के आसपास की रक्त केशिकाओं द्वारा अधिक पानी का पुनः अवशोषण होता है, जिससे मूत्र की मात्रा कम हो जाती है।
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