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Question
मनोवैज्ञानिक जाँच करते समय एक मनोवैज्ञानिक को किन नैतिक मार्गदर्शी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए?
Answer in Brief
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Solution
मनोवैज्ञानिक जाँच करते समय एक मनोवैज्ञानिक को निम्नलिखित नैतिक मार्गदर्शी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:
- स्वैच्छिक सहभागिता: यह सिद्धांत कहता है कि जिन व्यक्तियों पर आप अध्ययन करने जा रहे हैं उन्हें यह निर्धारित करने का विकल्प होना चाहिए कि वे अध्ययन में भाग लेंगे अथवा नहीं |
- सूचित सहमति: यह आवश्यक है कि प्रतिभागी को यह पता होना चाहिए कि अध्ययन के दौरान उनके साथ क्या घटित होगा |
- स्पष्टीकरण: अध्ययन समाप्त हो जाने के बाद प्रतिभागियों को वे सब आवश्यक सूचनाएँ देनी चाहिए जिनसे वे अनुसंधान को ठीक से समझ सकें |
- अध्ययन के परिणाम की भागीदारी: मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों में प्रतिभागियों से सूचनाएँ संगृहित करने के बाद हम अपने कार्य-स्थान पर वापस आते हैं, प्रदत्तों का विश्लेषण करते हैं एवं निष्कर्ष निकालते हैं | अनुसंधानकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि वह प्रतिभागियों के पास वापस जाकर अध्ययन के परिणाम को उनको बताए |
- प्रदत्त स्रोतों की गोपनीयता: अध्ययन में प्रतिभागियों को अपनी निजता का अधिकार होता है | अनुसंधानकर्ता को चाहिए कि वह उनकी निजता की रक्षा के लिए उनके द्वारा दी गई सूचनाओं को अत्यंत गोपनीय रखे |
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नैतिक मुद्दे
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