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“मेरे भीगे होने की चिन्ता मत करों।... जानती हो, इस तरह भीगना भी जीवन की महत्त्वाकांक्षा हो सकती है? वर्षों के बाद भीगा हूँ। अभी सूखना नहीं चाहता।” - Hindi (Indian Languages)

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Question

“मेरे भीगे होने की चिन्ता मत करों।... जानती हो, इस तरह भीगना भी जीवन की महत्त्वाकांक्षा हो सकती है? वर्षों के बाद भीगा हूँ। अभी सूखना नहीं चाहता।”

  1. उक्त कथन किसने, किससे कहा?     [1]
  2. उक्त कथन किस संदर्भ में कहा गया है?     [2]
  3. इस कथन का अन्तर्निहित अर्थ स्पष्ट कीजिए।     [2]
  4. उक्त संवाद के आलोक में वक्‍ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।     [5]
Very Long Answer
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Solution

i. यह कथन कालिदास द्वारा मल्लिका से कहा गया है।

ii. यह संवाद उस समय का है, जब कालिदास कई वर्षों बाद अपने जन्मस्थान, अर्थात अपने गाँव में लौटता है और अपनी बचपन की सखी व प्रेमिका मल्लिका से भेंट करता है। उस समय वर्षा हो रही होती है और मल्लिका उसे बारिश में भीगने से बचने की सलाह देती है। इसके प्रत्युत्तर में कालिदास यह भावुक और गहन अर्थ से भरा हुआ संवाद कहता है।

iii. इस कथन का अंतर्निहित भाव यह है कि भीगना मात्र एक शारीरिक अनुभूति नहीं होता, बल्कि उसमें गहरी भावनात्मक संवेदना भी समाहित होती है। कालिदास के लिए वर्षा प्रकृति, अपने अतीत और स्वयं से पुनः जुड़ने का प्रतीक बन जाती है।

iv. ‘आषाढ़ का एक दिन’ मोहन राकेश द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक है, जिसमें कालिदास का चरित्र एक संवेदनशील, सौंदर्यप्रिय और आत्ममग्न व्यक्तित्व के रूप में उभरता है। उपर्युक्त संवाद के माध्यम से कालिदास के व्यक्तित्व की गहराई को समझा जा सकता है। इस संवाद में वर्षा में भीगना उनके लिए मात्र एक सामान्य क्रिया नहीं है, बल्कि यह जीवन की आकांक्षाओं, संवेदनाओं और गहन अनुभूतियों का प्रतीक बन जाता है।

  1. संवेदनशील और सौंदर्यप्रिय व्यक्तित्व: कालिदास प्रकृति के गहरे प्रेमी हैं। उनके लिए वर्षा केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि एक आत्मीय और भावनात्मक अनुभूति है। वर्षों बाद भीगने का उनका आनंद इस बात का संकेत है कि वे जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को संजोते हैं और उन्हें पूर्ण रूप से जीना चाहते हैं। इससे उनका सूक्ष्म सौंदर्यबोध और गहरी संवेदनशीलता प्रकट होती है।
  2. आत्ममग्न और कल्पनाशील स्वभाव: कालिदास अपने विचारों और भावनाओं में इतने तल्लीन रहते हैं कि बाहरी परिस्थितियाँ उन्हें अधिक प्रभावित नहीं कर पातीं। वे वर्षा की ठंड या असुविधा की चिंता किए बिना उसमें भीगने को ही जीवन की पूर्णता मानते हैं। यह प्रवृत्ति उनकी कल्पनाशीलता और आत्मलीनता को दर्शाती है, जिसका प्रभाव आगे चलकर उनके काव्य में भी दिखाई देता है।
  3. आत्मविस्मृत और संघर्षशील व्यक्तित्व: कालिदास अपने जीवन और सृजन के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं। वे जीवन के प्रत्येक क्षण को गहराई से अनुभव करना चाहते हैं, इसलिए वर्षा में भीगने का अनुभव भी उनके लिए विशेष महत्व रखता है। यह संवाद दर्शाता है कि वे जीवन के संघर्षों के बावजूद भावनाओं से परिपूर्ण व्यक्ति हैं, जो कठिनाइयों से ऊपर उठकर सौंदर्य की खोज करते रहते हैं।
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