Advertisements
Advertisements
Questions
मार्क्सवादी लेखन किसे कहते हैं?
मार्क्सवादी इतिहास लेखन किसे कहते हैं?
Advertisements
Solution
स्वतंत्रता के बाद भारतीय इतिहास लेखन में कई नई वैचारिक धाराएँ उभरीं, जिनमें मार्क्सवादी इतिहास लेखन एक महत्वपूर्ण धारा मानी जाती है।
- मार्क्सवाद में मुख्य रूप से वर्ग संघर्ष पर जोर दिया जाता है। मार्क्स के सिद्धांतों से प्रेरित होकर जो इतिहास लेखन किया गया, उसे मार्क्सवादी इतिहास लेखन कहा जाता है।
- इस पद्धति में आर्थिक व्यवस्था, उत्पादन के साधन, उत्पादन की पद्धति तथा उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े मानव संबंधों का विशेष अध्ययन किया जाता है।
- मार्क्सवादी इतिहास लेखन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि सामाजिक घटनाओं का सामान्य लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
- मार्क्सवादी इतिहासकारों ने जाति व्यवस्था में आए परिवर्तनों का भी अध्ययन किया है। भारत में इस पद्धति को कोसंबी, डांगे और शरद पाटिल जैसे इतिहासकारों ने अपने इतिहास लेखन में प्रभावी रूप से अपनाया है।
RELATED QUESTIONS
संस्कृत ग्रंथ ‘हितोपदेश’ का जर्मन भाषा में ______ ने अनुवाद किया।
निम्न में से असत्य जोड़ी को पहचानकर लिखिए।
निम्न कथनों को कारणसहित स्पष्ट कीजिए।
प्रादेशिक इतिहास लेखन को प्रोत्साहन मिला।
इतिहास लेखन में इतिहासकार वि. का. राजवाडे के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
निम्न सारिणी पूर्ण कीजिए।
| जेम्स मिल | द हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया |
| जेम्स ग्रांट डफ | _________________ |
| __________ | द हिस्ट्री ऑफ इंडिया |
| श्री. अ. डांगे | ________________ |
| ___________ | हू वेअर द शूद्राज |
निम्न संकल्पनाचित्र को पूर्ण कीजिए।

निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
प्राच्यवादी इतिहास लेखन
निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
राष्ट्रवादी इतिहास लेखन
निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
उपेक्षितों का इतिहास
उन्नीसवीं शताब्दी में स्त्रियों के विषय में लेखन करने वाली लेखिकाओं में ______ का नाम अग्रणी है।
