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“लेकिन मुसीबत सिर्फ रुपयों की ही तो नहीं हैं। उत्तना तो तुम्हें अभी भी मिलता है। असली मुसीबत तो यह है कि हमारे सपने बहुत ऊँचे हैं। भविष्य के नक्शे बिल्कुल अलग हैं।” - Hindi (Indian Languages)

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Question

“लेकिन मुसीबत सिर्फ रुपयों की ही तो नहीं हैं। उत्तना तो तुम्हें अभी भी मिलता है। असली मुसीबत तो यह है कि हमारे सपने बहुत ऊँचे हैं। भविष्य के नक्शे बिल्कुल अलग हैं।”

  1. प्रस्तुत पंक्तियों के वक्ता और श्रोता कौन हैं?     [1]
  2. उक्त पंक्तियों में किस सपने की बात की जा रही है?     [2]
  3. संयुक्त परिवार में युवकों की क्या स्थिति होती है? उपन्यास के संदर्भ में बताइए।     [2]
  4. उक्त संवाद के आलोक में वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।     [5]
Very Long Answer
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Solution

i. प्रस्तुत पंक्तियों की वक्ता प्रभा है तथा श्रोता समर है।

ii. इन पंक्तियों में समर और उसकी पत्नी प्रभा के भविष्य से जुड़े सपनों का उल्लेख किया गया है। समर एक महत्वाकांक्षी युवक है, जो केवल आर्थिक स्थिति सुधारने तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने जीवन को बड़े उद्देश्यों और ऊँचे आदर्शों के साथ जीने की आकांक्षा रखता है।

iii. ‘सारा आकाश’ उपन्यास के अनुसार संयुक्त परिवार में रहने वाले युवकों की स्थिति इस प्रकार दिखाई देती है

  1. स्वतंत्र निर्णय लेने की आज़ादी का अभाव
  2. आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भरता
  3. पारिवारिक दबावों और जिम्मेदारियों का बोझ
  4. सपनों और वास्तविकता के बीच निरंतर संघर्ष

iv. ‘सारा आकाश’ उपन्यास प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र यादव द्वारा रचित है। इस उपन्यास में मध्यवर्गीय परिवारों की समस्याएँ, दांपत्य जीवन के संघर्ष तथा सामाजिक व्यवस्था के बीच जन्म लेने वाली मानसिक कुंठाओं का यथार्थ चित्रण किया गया है। मुख्य पात्र समर और प्रभा के वैवाहिक जीवन के माध्यम से भारतीय समाज की जटिलताओं को उजागर किया गया है। 
संवादों के आधार पर प्रभा के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं-

  1. महत्त्वाकांक्षी और स्वप्नद्रष्टा: प्रभा केवल वर्तमान परिस्थितियों में संतोष करने वाली स्त्री नहीं है, बल्कि वह अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखती है। वह जीवन में कुछ विशेष हासिल करना चाहती है और सीमित साधनों में बँधकर रहना उसे स्वीकार नहीं है।
  2. व्यावहारिक दृष्टिकोण: प्रभा यथार्थवादी सोच रखती है और समझती है कि समस्या केवल आर्थिक अभाव की नहीं, बल्कि अपने ऊँचे सपनों और आदर्शों को साकार करने की है। वह अपने और समर के भविष्य को लेकर स्पष्ट दृष्टि रखती है।
  3. मानसिक रूप से सशक्त: समाज में महिलाओं को प्रायः परिस्थितियों से समझौता करना सिखाया जाता है, किंतु प्रभा अपने विचारों और आकांक्षाओं को लेकर दृढ़ रहती है। वह केवल परिस्थितियों पर दुख व्यक्त नहीं करती, बल्कि समाधान खोजने की दिशा में सोचती है।
  4. आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की भावना: प्रभा आर्थिक और मानसिक दोनों रूपों में आत्मनिर्भर होना चाहती है। वह चाहती है कि उसका जीवन केवल परिवार और परंपराओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे अपने सपनों को साकार करने के अवसर भी प्राप्त हों।
  5. संवेदनशील किंतु दृढ़ निश्चयी: अपने जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से वह डरती नहीं है, बल्कि उनके समाधान खोजने का प्रयास करती है। इससे स्पष्ट होता है कि वह भावुक होने के साथ-साथ आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भी है।
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