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क्या राजकोषीय घाटा आवश्यक रूप से स्फीतिकारी होता है? - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

क्या राजकोषीय घाटा आवश्यक रूप से स्फीतिकारी होता है?

Answer in Brief
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Solution

यह हमेशा स्फीतिकारी हो यह आवश्यक नहीं। यदि राजकोषीय घाटे का प्रयोग उत्पादक क्रियाओं के लिए किया गया हो, जिससे अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति में वृद्धि हो तो संभव है कि राजकोषीय घाटा स्फीतिकारी सिद्ध न हो, परंतु वास्तव में सरकार द्वारा लिये जाने वाले उधार का एक महत्वपूर्ण संघटक भारतीय रिजर्व बैंक है। इसके कारण अर्थव्यवस्था में मुद्रा पूर्ति में वृद्धि होती है। मुद्रा पूर्ति में वृद्धि के कारण प्राय: कीमत स्तर में वृद्धि होती है। कीमत स्तर में साधारण वृद्धि उच्च लाभों के द्वारा अधिक निवेश को प्रेरित कर सकती है। परन्तु जब कीमत वृद्धि का स्तर भयाप्रद सीमाओं तक बढ़ जाता है, तो इसके कारण

  1. आगतों को लागतों में वृद्धि तथा
  2. मुद्रा की गिरती क्रय क्षमता के कारण समग्र माँग में कमी होती है। आगतों की लागतों में वृद्धि तथा समग्र माँग में कमी एक साथ मिलकर निवेश में कमी करते हैं, जिसके कारण सकल घरेलू उत्पाद में कमी होती है। अंततः अर्थव्यवस्था में AD कम होने से अपस्फीति भी हो सकती है और आर्थिक मंदी भी जन्म ले सकती है।
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संतुलित, अधिशेष एवं घाटा बजट
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Chapter 5: सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था - अभ्यास [Page 89]

APPEARS IN

NCERT Arthashastra Samisht Arthashastra ek Parichay [Hindi] Class 12
Chapter 5 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था
अभ्यास | Q 13. | Page 89
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