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Question
| क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना, कुछ ना आया काम तेरा, शोर करना गुल मचाना, माना कि उन शक्तियों के साथ चलता जोर किसका किन्तु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना जो बसे हैं, वो उजड़ते हैं, प्रकृति के जड़ नियम से, पर किसी उजड़े हुए को, फिर बसाना कब मना है? है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है? |
- प्रस्तुत पद्यांश के कवि तथा कविता का नाम लिखिए। यह किस प्रकार की कविता है? [1.5]
- ‘प्यार का आशियाना’ कैसे उजड़ गया? मनुष्य का शोरगुल मचाना काम क्यों नहीं आया? [3]
- ‘निर्माण के प्रतिनिधि’ किसे कहा गया है और क्यों? ‘प्रकृति का जड़ नियम’ क्या है? समझाइए। [3]
- प्रस्तुत कविता से कवि क्या सन्देश देना चाहते हैं? समझाकर लिखिए। [5]
Comprehension
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Solution
- प्रस्तुत पद्यांश के कवि हरिवंश राय बच्चन हैं और कविता का नाम है अंधेरे का दीपक'। यह कविता सकारात्मकता का प्रतीक है और एक आशावादी कविता है।
- प्यार का आशियाना समय की तेज आँधी से उजड़ गया है। कवि कहते हैं कि प्रकृति की शक्ति और नियम किसी को नहीं चलाते। मनुष्य के शोर से कुछ नहीं बदलेगा। इसलिए आदमी को यथार्थवादी बनना होगा। विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों से हार नहीं माननी चाहिए। शोर करना दुख कम नहीं करेगा। यही कारण है कि हमें जाने वाले की याद में निराश और निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। प्रकृति में उत्पत्ति और विनाश का क्रम निरंतर जारी रहता है।
- मानव को निर्माण का प्रतिनिधि कहा जाता है क्योंकि वह सब कुछ बनाता और सैंवारता है जब प्रकृति सब कुछ बर्बाद कर देती है। मनुष्य अपने पुरुषार्थ और क्षमता से उजड़े हुए को पुनःस्थापित करता है। प्रकृति का मूल नियम है कि सब कुछ जो बसा है, अवश्य ही उजड़ेगा। इस दुनिया में कुछ भी खत्म नहीं होता। बनाने के बाद विनाश और पुनर्निर्माण का क्रम जारी रहता है। मानव को परिवर्तन से विचलित होकर निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह अनिवार्य सत्य है। उसे हमेशा काम करने की ओर बढ़ना चाहिए।
- कवि आशावाद फैलाना चाहते हैं। यह कविता सकारात्मक है। यह कविता आशा और विश्वास पर आधारित है। मानव जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं। इसी कारण दीपक और अंधेरी रात का उल्लेख भी किया गया है। प्रकृति का मूल नियम निर्माण और ध्वंस है। कवि ने इस कविता में दुखद घटनाओं और असफलताओं से निराश नहीं होने और आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश दिया है। दुःखों में भी धैर्य रखना चाहिए। सृजन और विध्वंस क्रमानुसार निरंतर चलते रहेंगे। विपरीत हालात में निराश नहीं होना चाहिए। हर समय सकारात्मक होना चाहिए। वास्तविक जीवन का सुख केवल आशा और विश्वास से मिल सकता है।
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