Advertisements
Advertisements
Question
“क्या दिन-रात की चख-चख होती रहती है? दिन निकला और शुरू हो गया। कोई और काम नहीं है क्या? नौ बज रहे हैं।”
- उक्त कथन के वक्ता और श्रोता कौन हैं? (1)
- वक्ता के उक्त कथन पर परिवार के सदस्यों की क्या प्रतिक्रिया थी? वक्ता की माँ ने उसके इस कथन पर क्या कहा? (2)
- ‘दिन-रात की चख-चख’ किसके कारण हो रही थी? उसकी कोई दो विशेषताएँ लिखिए। (2)
- ‘संयुक्त परिवार में रहकर कोई अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर पाता है।’ क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उपन्यास के आधार पर लिखिए। (5)
Very Long Answer
Advertisements
Solution
- यह कथन समर के बड़े भाई ने अपनी माँ और पत्नी से कहा।
- वक्ता की इस बात पर परिवार के किसी सदस्य ने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। अम्मा का मत था कि यदि बच्चे काम न करें तो पूरा घर बिगड़ जाएगा। उनका कहना था कि बड़े लोग तो कोई काम करना ही नहीं चाहते। बच्चों से थोड़ा-बहुत काम कराने में क्या बुराई है। छोटे-छोटे कामों में ही थक जाने की बात कही जाती है। बस उन्हें पलंग पर बैठा दो और हाथ में किताब पकड़ा दो - क्या दूसरे घरों की बहुएँ काम नहीं करतीं? क्या मायके में उनके पास बहुत सारे नौकर थे?
- बच्चों के छोटे होने के कारण अम्मा केवल उन्हीं की देखभाल कर पाती थीं। प्रमा दिन में अठारह घंटे से अधिक काम करती थी और सबके ताने भी सुनती रहती थी। उसे अपने लिए समय नहीं मिल पाता था। अम्मा ने उसे सिर न धोने और गंदा रहने के लिए डाँटा, जिससे बात बढ़ गई। प्रमा शिक्षित है, बड़ों का सम्मान करती है, लेकिन परदे जैसी दिखावटी परंपराओं में विश्वास नहीं करती। वह मेहनती है और बिना किसी बहाने के पूरे घर का काम करती रहती है।
- हम शिशिर भाई के इस विचार से सहमत हैं। संयुक्त परिवार भारत की प्राचीन परंपरा है, लेकिन एकल परिवार से संयुक्त परिवार बनने पर सबसे अधिक कठिनाई आती है, क्योंकि आय वही रहती है जबकि परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ जाती है। इससे घर के प्रबंधन और व्यवहार में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। शिशिर भाई समझदार हैं और जानते हैं कि संयुक्त परिवार का विचार भले ही महान हो, पर यदि जीवन को आगे बढ़ाना है तो कभी-कभी इस परंपरा को तोड़ना आवश्यक हो जाता है। वे नौकरी के साथ एम.ए. करना चाहते हैं और प्रमा कॉलेज जाना चाहती है। यदि एक स्त्री रात तीन बजे से रात ग्यारह बजे तक दासी की तरह काम करेगी, तो संयुक्त परिवार में उसका पढ़ाई का सपना कैसे पूरा होगा?
पारिवारिक झगड़े, आत्मग्लानि, ईर्ष्या और प्रतिशोध जैसी भावनाएँ वातावरण को विषैला बना देती हैं, जिसमें व्यक्ति का विकास संभव नहीं हो पाता। आर्थिक तनाव और पारिवारिक कलह के बीच मनुष्य फँस जाता है। परिणाम स्वरूप न उसे अनुकूल पारिवारिक माहौल मिलता है और न ही वह आगे बढ़ पाता है। लेखक का मानना है कि एक-दो संतानों तक समस्या नहीं होती, लेकिन अधिक संतानें होने पर कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं।
shaalaa.com
Is there an error in this question or solution?
