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किसी गोले का, इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व - आघूर्ण 2MR2/5 है, जहाँ M गोले का द्रव्यमान एवं R इसकी त्रिज्या है। गोले पर खींची गई स्पर्श रेखा के परितः इसका जड़त्व - आघूर्ण ज्ञात कीजिए। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

 किसी गोले का, इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व - आघूर्ण 2MR2/5 है, जहाँ M गोले का द्रव्यमान एवं R इसकी त्रिज्या है। गोले पर खींची गई स्पर्श रेखा के परितः इसका जड़त्व - आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

Numerical
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Solution

दिया है : गोले का द्रव्यमान = M, त्रिज्या = R

रेखा AB गोले की एक स्पर्श रेखा है जिसके परितः गोले का जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात करना है। स्पर्श रेखा AB के समान्तर, गोले का एक व्यास PQ खींचा।

प्रश्नानुसार, व्यास PQ (जो कि गोले के केन्द्र से जाता है) के परितः गोले का जड़त्व-आघूर्ण।

`"I"_"G" = 2/5 "MR"^2`

समान्तर अक्षों की प्रमेय से,

स्पर्श रेखा AB के परितः गोले का जड़त्व - आघूर्ण

`"I" = "I"_"G" + "Md"^2`

(d = समान्तर अक्षों के बीच की दूरी = OC = R)

= `2/5  "MR"^2 + "MR"^2`

`"I" = 7/5  "MR"^2`

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द्रव्यमान केन्द्र की गति
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कणों के किसी निकाय की गति को इसके द्रव्यमान केन्द्र की गति और द्रव्यमान केन्द्र के परितः गति में अलग-अलग करके विचार करना। दर्शाइए कि –

  1.  `"p" = "p"_"i"^"'" + "m"_"i""V"` जहाँ है  `"p"_"i"` (mi द्रव्यमान वाले) i-वे कण का संवेग है और `"p"_"i"^"'" = "m"_"i""v"_"i"^"'"`।  ध्यान दें कि `"v"_"i"^"'"` द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष i – वे कण का वेग है। द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा का उपयोग करके यह भी सिद्ध कीजिए कि `∑"p"_"t"^"'" = "O"`
  2. `"K" = "K"^"'" + 1//2 "MV"^2` K कणों के निकाय की कुल गतिज ऊर्जा, K’ = निकाय की कुल गतिज ऊर्जा जबकि कणों की गतिज ऊर्जा द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष ली जाए। MV2/2 सम्पूर्ण निकाय के (अर्थात् निकाय के द्रव्यमान केन्द्र के) स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा है।
  3. `"L" = "L"^"'" + "R" xx "MV"`
    जहाँ `"L"^"'" = ∑"r"_"i"^"'" = "r"_"i" - "R"` : शेष सभी चिह्न अध्याय में प्रयुक्त विभिन्न राशियों के मानक चिह्न हैं। ध्यान दें कि `"L"^"'"` द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय का कोणीय संवेग एवं MR × V इसके द्रव्यमान केन्द्र का कोणीय संवेग है।
  4. `"dL"^"'"/"dt" = ∑"r"_"i"^"'" xx "dp"^"'"/"dt"`
     यह भी दर्शाइए की `"dL"^"'"/"dt" = τ_"ext"^"'"`
    (जहाँ `τ_"ext"^"'"`द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय पर लगने वाले सभी बाह्य बल आघूर्ण हैं।)
    [संकेत – दव्यमान केन्द की परिभाषा एवं न्यूटन के गति के तृतीय नियम का उपयोग कीजिए। यह मान लीजिए कि किन्ही दो कणों के बीच के आन्तरिक बल उनको मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करते हैं।] 

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