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Question
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
वकील
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Solution
आज के समाज में अनेक वकीलों का मुख्य उद्देश्य न्याय की स्थापना के बजाय किसी भी तरह धन कमाना रह गया है। वे यह नहीं देखते कि उनका पक्ष सही है या गलत; उनका ध्यान केवल अपने मुवक्किल को जीत दिलाने पर होता है। जब वे अपने तर्कों और चालाकी से झूठ को भी सच साबित कर देते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है। नमक के मुकदमे में जब मजिस्ट्रेट ने पंडित अलोपीदीन के पक्ष में निर्णय दिया, तो उनके वकील अत्यंत प्रसन्न हुए। अलोपीदीन की गिरफ्तारी के बाद वकीलों ने न केवल उन्हें निर्दोष सिद्ध कर दिया, बल्कि ईमानदार नमक के दारोगा मुंशी वंशीधर को ही दोषी ठहराया। अदालत ने यह टिप्पणी की कि वंशीधर की जल्दबाजी और अविवेकपूर्ण कार्यवाही के कारण एक सम्मानित व्यक्ति को अनावश्यक कष्ट उठाना पड़ा, इसलिए उन्हें भविष्य में अधिक सावधानी और समझदारी से काम लेना चाहिए।
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कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
वृद्ध मुंशी
कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-
शहर की भीड़
“नमक का दारोगा' कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए।
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पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो।
पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।
पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-
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खेद ऐसी समझ पर! पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया।
धर्म ने धन को पैरों तले कुचल डाला।
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