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कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर

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Question

कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-

वकील

Very Long Answer
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Solution

आज के समाज में अनेक वकीलों का मुख्य उद्देश्य न्याय की स्थापना के बजाय किसी भी तरह धन कमाना रह गया है। वे यह नहीं देखते कि उनका पक्ष सही है या गलत; उनका ध्यान केवल अपने मुवक्किल को जीत दिलाने पर होता है। जब वे अपने तर्कों और चालाकी से झूठ को भी सच साबित कर देते हैं, तो उन्हें बहुत खुशी होती है। नमक के मुकदमे में जब मजिस्ट्रेट ने पंडित अलोपीदीन के पक्ष में निर्णय दिया, तो उनके वकील अत्यंत प्रसन्न हुए। अलोपीदीन की गिरफ्तारी के बाद वकीलों ने न केवल उन्हें निर्दोष सिद्ध कर दिया, बल्कि ईमानदार नमक के दारोगा मुंशी वंशीधर को ही दोषी ठहराया। अदालत ने यह टिप्पणी की कि वंशीधर की जल्दबाजी और अविवेकपूर्ण कार्यवाही के कारण एक सम्मानित व्यक्ति को अनावश्यक कष्ट उठाना पड़ा, इसलिए उन्हें भविष्य में अधिक सावधानी और समझदारी से काम लेना चाहिए।

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नमक का दारोगा
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Chapter 1.01: नमक का दारोगा - अभ्यास [Page 16]

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NCERT Hindi Aaroh bhag 1 [English] Class 11
Chapter 1.01 नमक का दारोगा
अभ्यास | Q 3. (ख) | Page 16

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कहानी का कौन-सा पात्र आपको सर्वाधिक प्रभावित करता हैं और क्यों?


'नमक का दारोगा' कहानी में पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन से दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं?


कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-

वृद्ध मुंशी 


कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं।निम्नलिखित पात्र के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करता हैं-

शहर की भीड़


“नमक का दारोगा' कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए।


कहानी के अंत में अलोपीदीन के वंशीधर को मैनेजर नियुक्त करने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए। आप इस कहानी का अंत किस प्रकार करते? 


नमक विभाग के दारोगा पद के लिए बड़ों-बड़ों का जी ललचाता था। वर्तमान समाज में ऐसा कौन-सा पद होगा जिसे पाने के लिए लोग लालायित रहते होंगे और क्यों?


अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि जब आपके तरकों ने आपके भ्रम को पुष्ट किया हो।


पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो।


पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो।


पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया। वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट संदर्भ में कही गई थी। अपने निजी अनुभव के आधार पर बताइए-

“पढ़ना-लिखना' को किस अर्थ में प्रयुक्त किया गया होगा:

साक्षरता अथवा शिक्षा? (क्या आप इन दोनों को समान मानते हैं?)


लड़कियाँ हैं, वह घास-फूस की तरह बढ़ती चली जाती हैं। वाक्य समाज में लड़कियों की स्थिति की किस वास्तविकता को प्रकट करता है?


इसलिए नहीं कि अलोपीदीन ने क्यों यह कर्म किया बल्कि इसलिए कि वह कानून केपंजे में कैसे आए। ऐसा मनुष्य जिसके पास असाध्य साधन करनेवाला धन और अनन्य वाचालता हो, वह क्यों कानून के पंजे में आए। प्रत्येक मनुष्य उनसे सहानुभूति प्रकट करता था। अपने आस-पास अलोपीदीन जैसे व्यक्तियों को देखकर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? उपर्युक्त टिप्पणी को ध्यान में रखते हुए लिखें।


नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर की मज़ार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए।


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न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह जैसे चाहती हैं, नचाती हैं।


दुनिया सोती थी, पर दुनिया की जीभ जागती थी।


खेद ऐसी समझ पर! पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया।


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भाषा की चित्रात्मकता, लोकोक्तियों और मुहावरों का जानदार उपयोग तथा हिंदी-उर्दू के साझा रूप एवं बोलचाल की भाषा के लिहाज़ से यह कहानी अद्भुत है। कहानी में से ऐसे उदाहरण छाँट कर लिखिए और यह भी बताइए कि इनके प्रयोग से किस तरह कहानी का कथ्य अधिक असरदार बना है?


कहानी में मासिक वेतन के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया गया है? इसके लिए आप अपनी ओर से दो-दो विशेषण और बताइए। साथ ही विशेषणों के आधार को तर्क सहित पुष्ट कीजिए।


(क) बाबूजी आशीर्वाद!

(ख) सरकार हुक्म!

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(घ) कानपुर!

दी गई विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ एक निश्चित संदर्भ में अर्थ देती हैं। संदर्भ बदलते ही अर्थ भी परिवर्तित हो जाता है। अब आप किसी अन्य संदर्भ में इन भाषिक अभिव्यक्तियों का प्रयोग करते हुए समझाइए।


'नमक का दारोगा’ कहानी को पढ़कर बड़ी-बड़ी डिग्रियों, न्याय और विद्वता के बारे में आपकी क्या धारणा बनती है? वर्तमान समय को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शिक्षकों के साथ एक परिचर्चा आयोजित करें।


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