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Question
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
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जब हम छोटे थे, हमें सिखाया गया कि होशियार बनों। अच्छे नंबर लाओ। जीत कर दिखाओ। धीरे-धीरे ये तमाम सीखें आदत मैं बदल गईं और पता भी नहीं चला कि कब ये आदत हमारे मन की एक दौड़ मैं बदल गईं। दूसरों से आगे निकलने की दौड़। कभी कक्षा में प्रथम आने की, कभी ऑफिस में पदोन्नति की, कंभी समाजे में इज्जत कमाने की और कभी अपने ही भाई-बहनों दोस्तों, रिश्तेदारों से बेहतर दिखने की। परंतु इस लगातार चलने वाली दौड़ में हम भूल गए कि जिस आत्मा को लेकर। निकले थे, वह कहाँ है? हर सुबह उठते हैं और सोचते हैं कि किसे पछाड़ना है। हर शाम थककर सोते हैं और गिनते हैं कि कितने पीछे रह गए। यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं है, आत्मा की थकान भी है क्योंकि हमने अपनी गति किसी और की रफ़्तार से बाँध दी हैं। हम अपने फैसले किसी और की कामयाबी देखकर लेने लगे हैं। वो किताब क्यों पढ़ रहे हो? क्योंकि सब पढ़ रहे हैं। वो कोर्स क्यों कर रहे हो? क्योंकि उससे नौकरी मिलती है। शहर क्यों जा रहे हो? क्योंकि वहाँ ज़्यादा अवसर हैं। और धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी, हमारी नहीं रह जाती। वह एक नक़ल बन जाती है, दूसरों के रास्तों की, दूसरों के रास्तों की, दूसरों के सपनों की। ऐसा नहीं है कि प्रतिस्पर्धा बुरी चीज है। आपको अगर किसी से आगे ही निकलना है, तो उस ‘आप’ से निकलिए, जो डरता है, जो टालता है, जो रोज़ कहता है ‘कल से’। आपका अपना असली प्रतिद्वंद्वी कोई और नहीं, हमारा ही कल का, हमारा ही पुराना संस्करण है। आज के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में, जहाँ सोशल मीडिया हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को चमका कर पेश करता हैं, वहाँ अपने ही भीतर स्थिर रहना एक साधना है। खुशी और संतोष हमेशा भीतर से आते हैं और उनका रास्ता आत्म-साक्षात्कार से होकर जातां है, ना कि तुलना और प्रतियोगिता से। |
- गद्यांश के आधार पर लगातार दूसरों से की जा रही प्रतिस्पर्धा की हानि/हानियाँ है/हैं।
उचित विकल्प का चयन कर लिखिए:
I. शारीरिक थकान
II. आत्मा की थकान
III. सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि
IV. आर्थिक नुकसान
विकल्प:- I और II दोनों
- I, II और III तीनों
- I, II और तीनों
- I और IV दोनों
- सोशल मीडिया के युग में अपने भीतर स्थिर रहना एक साधना क्यों है?
- यह दूसरों की उपलब्धियों को नज़र-अंदाज़ करना सिखाता है।
- इससे हम अधिक सफल और प्रसिद्ध हो सकते हैं।
- हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- प्रतिस्पर्धात्मक युग में इंद्रियों पर नियंत्रण कठिन है।
- निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए:
कथन: हमें अपनी ज़िंदगी में दूसरों के सपनों का अनुकरण बंद कर देना चाहिए।
कारण: दूसरों की नक़ल से सच्ची खुशी मिल सकती है।- कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की उचित व्याख्या है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं किंतु कारण कथन की उचित व्याख्या नहीं है।
- हम सभी को बचपन में कौन-सी सीख दी जाती है और उसका क्या प्रभाव हमारे स्वभाव पर पड़ता है?
- खुशी और संतुष्टि किस प्रकार मिल सकती है? आप उसे पाने के लिए क्या करेंगे?
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Solution
- (A) I और II दोनों
- (C) हर दिन दूसरों की उपलब्धियों को दिखा ललचाता रहता है।
- (B) कथन सही है किंतु कारण गलत है।
- हमें बचपन से समझदार बनने, अच्छे अंक प्राप्त करने और दूसरों से आगे निकलकर दिखाने की शिक्षा मिलती है। इसका असर यह होता है कि हमारे मन में दूसरों से आगे बढ़ने की एक कभी न समाप्त होने वाली होड़ शुरू हो जाती है, जिससे हम अपनी मानसिक शांति खो बैठते हैं।
- आनंद और शांति आत्म-बोध (खुद को समझने) से प्राप्त हो सकती हैं। इसे हासिल करने के लिए हमें दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा और अपनी गति से अपने लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
