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“जैसे भी हो, इस बार बेटू को अपने साथ लेकर ही जाना होगा। यही हाल रहा तो इसकी जिंदगी चौपट हो जाएगी। यह भी कोई ढंग है भला।” (i) उक्त कथन कौन, किससे और किस संदर्भ में कह रहा है? [1.5] - Hindi (Indian Languages)

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Question

“जैसे भी हो, इस बार बेटू को अपने साथ लेकर ही जाना होगा। यही हाल रहा तो इसकी जिंदगी चौपट हो जाएगी। यह भी कोई ढंग है भला।”

  1. उक्त कथन कौन, किससे और किस संदर्भ में कह रहा है?     [1.5]
  2. श्रोता उक्त कथन सुनकर धर्म-संकट में क्यों था?     [3]
  3. बेटू के आ जाने से अम्मा का जीवन किस तरह बीतता था?     [3]
  4. ‘मजबूरी’ कहानी के माध्यम से कहानीकारा पाठकों का ध्यान किस ओर आकृष्ट कर रही हैं?     [5]
Very Long Answer
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Solution

  1. रमा ने अपने पति रामेश्वर से यह कहा। रमा दूसरी बार गाँव आते ही बेटू के व्यवहार और चाल-ढाल से चिंतित हो जाती है। वह अपनी बेटी को साथ ले जाने की बात कहती है क्योंकि उसे लगता है कि उसकी माँ उसे अच्छे व्यवहार करने नहीं दे रही है।
  2. श्रावक रामेश्वर ने इस बात को सुनकर धर्मसंकट में पड़ गया क्योंकि अम्मा बहुत दुखी होगी अगर वे बेटे को अपने साथ ले जाएंगे। बेटू भी माँ से बहुत प्यार करता था। अम्मा से अलग रहना मुश्किल था। दूसरी ओर, पत्नी का कहना भी सही था कि बेटू को शहर ले जाकर उसे शिक्षा दी जाए। वह धर्मसंकट में था क्योंकि वह अम्मा की भावनाओं और बेटू के भविष्य से परेशान था, इसलिए वह सब कुछ रमा पर छोड़कर अकेले बम्बई चला जाता है।
  3. बेटू के आने से अम्मा का जीवन बदल जाता है। वह अपने बेटे का बचपन पोते में देखती है। अम्मा का सारा दिन बेटू को खिलाने-पिलाने और देखभाल करने में बीतता था। वह सारा दिन बेटू को अपने पास सुलाती, उसके साथ खेलती और गोद में रखती रहती थी। बेटू के आने से अम्मा भी अपनी गठिया की पीड़ा भूल जाती है। वह उसे कहानियाँ और लोरियाँ भी सुनाती है। वह उसके हर सपने पूरा करती। अपने पोते के लिए बोतल में दूध भरना और घड़ी में समय देखना सीखती है। बेटू के आने से जीवन में कुछ बदलाव आया लगता है।
  4. मजबूरी कहानी में कहानीकार मन्नू भंडारी ने नारी मन की कोमल भावनाओं और बुढ़ापे में अकेलेपन की समस्या को दिलचस्प ढंग से चित्रित किया है। जीवन की परिस्थितियों में एक स्त्री के सामने आने वाली चुनौतियों का भावुक वर्णन किया गया है। वात्सल्यमयी माँ की ममता दिल को छूती है। कहानी कहती है कि अम्मा अपने बेटे और पोते से बहुत प्यार करती है। रमा और रामेश्वर ने अपने पहले बेटे बेटू को अपनी माँ के पास छोड़ दिया क्योंकि वे एक और बच्चा चाहते थे। अम्मा अपने पुत्र का बचपन बेटू में देखती है। थोड़ा बड़ा होने पर बेटू भी अपनी दादी को भूल जाता है और मुंबई चला जाता है। इस तरह, लेखक ने मजबूरी-कहानी के माध्यम से सभी पात्रों की परेशानियों को उजागर करने का प्रयास किया है।
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