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हिंदुस्तान का आदमी वनस्पति को अपना प्रतिरूप मानता है। संतान को वासुदेव वृक्ष के रूप में देखता है। इसीलिए बिना वनस्पति के हिंदुस्तान का कोई भी अनुष्ठान संपन्न नहीं होता। - Hindi

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Question

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

हिंदुस्तान का आदमी वनस्पति को अपना प्रतिरूप मानता है। संतान को वासुदेव वृक्ष के रूप में देखता है। इसीलिए बिना वनस्पति के हिंदुस्तान का कोई भी अनुष्ठान संपन्न नहीं होता। मनुष्य से मनुष्य का संबंध, वनस्पति से वनस्पति का संबंध, लता और वृक्ष का संबंध है। एक तरह से मनुष्य और वनस्पति की यात्रा समानांतर होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी मनुष्य का विस्तार वंश-वृक्ष बनता है। वंश शब्द के दो ही अर्थ हैं - बाँस और पुत्र। कोई भी उत्सव होगा, हरे बाँस की पताका फहराई जाएगी, केले के खंबे लगेंगे, आम के पत्तों की बंदनवार लगाई जाएगी। कलश पर पाँच वृक्षों के पल्लव रखे जाएँगे, उसके ऊपर नारियल रखा जाएगा। हरा नहीं मिलेगा तो सूखा या उसके भीतर का गोला रखा जाएगा। सुपारी की पार्वती बनेगी। दूब से हर देवता को हल्दी छिड़की जाएगी। हर चौक में कमल के पत्तों की अल्पना रची जाएगी। कोई भी पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन बिना पुष्पांजलि के पूरा नहीं होगा। कोई भी होम नारियल की पूर्ण आहुति के बिना संपन्न नहीं होगा। किसी का भी अभिनंदन करना हो पान-सुपारी, हल्दी, दूब, नारियल थाल में जरूर सजेंगे। कोई भी मांगलिक मंडप बनेगा तो पलाश के पत्तों से बनेगा। हिंदुस्तान का कोई भी गाँव अगर दूर से पहचाना जा सकता है तो अमराई, बँसवारी, महुआवारी, सिसवानी, ताड़-खजूरों की पंक्ति, नारियल की पंक्ति, पाकड़ की पंक्ति या तमालराजी की क्षितिज रेखा से ही पहचाना जाता है। गाँव के नाम तक पेड़ों पर होते हैं - पिपरा, बरगदवा, पकड़ी, फुलवरिया, अमौना, जमुई, तरुकुलवा, खजुराही, सिसवा, वेलपार, इमलिया, बाँसगाँव, कटहरवा।
  1. तालिका पूर्ण कीजिए:      (२)
    अभिनंदन के लिए थाल में सजने वाली चीजें
     
     
     
     

  2. पेड़ों के नाम से गाँव के नाम लिखिए:      (२)   
    1. इमली = ------------
    2. खजूर = ------------
    3. बरगद = ------------
    4. कटहर = ------------
  3. ‘भारतीय संस्कृति का महत्त्व’, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।      (२)
Comprehension
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Solution

  1. अभिनंदन के लिए थाल में सजने वाली चीजें
    पान-सुपारी 
    हल्दी 
     दूब
     नारियल
    1. इमली = इमलिया
    2. खजूर = खजुराही
    3. बरगद = बरगदवा
    4. कटहर = कटहरवा
  2. हमारा देश संस्कृति पर आधारित है, और हम जन्म से ही विभिन्न संस्कृतियों का पालन करते हुए बड़े होते हैं। माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करना हमारे लिए धर्म की तरह है। अच्छी आदतें अपनाना, दूसरों के साथ अच्छे संबंध रखना, अतिथियों की सेवा करना, असहाय लोगों की मदद करना, जीवों पर दया करना, धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना और पूजा करना, सभी के साथ मिलकर रहना और संकट के समय दूसरों की सहायता करना, ये सभी हमारी संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलू हैं। ये संस्कार ऐसे हैं, जो लोगों में प्रेम, अच्छे गुण और देश में शांति और सद्भाव बनाए रखने में मदद करते हैं। भारतीय संस्कृति बहुत प्राचीन है और आज यह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो रही है। “सादा जीवन, उच्च विचार” भारतीय दर्शन और यहाँ के लोगों की जीवनशैली का हिस्सा रहा है। इस प्रकार, भारतीय संस्कृति का अत्यधिक महत्त्व है।
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