Advertisements
Advertisements
Question
गरीबों के बीच काम कर रहे एक कार्यकर्त्ता का कहना है कि गरीबों को मौलिक अधिकारों की ज़रूरत नहीं है। उनके लिए ज़रूरी यह है कि नीति-निर्देशक सिद्धांतों को कानूनी तौर पर बाध्यकारी बना दिया जाए। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर का कारण बताएँ।
Advertisements
Solution
मैं इस कथन से सहमत नहीं हैं, क्योंकि नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार नीति-निर्देशक तत्त्वों से अधिक आवश्यक हैं। नीति-निर्देशक तत्त्वों को बाध्यकारी (न्यायसंगत) नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि हमारे पास सभी को नीति-निर्देशक तत्त्वों में दी गई सुविधाओं को प्रदान करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि जो जातियाँ पहले झाड़ू देने के काम में लगी थीं उन्हें अब भी मज़बूरन यही काम करना पड़ रहा है। जो लोग अधिकार-पद पर बैठे हैं वे इन्हें कोई और काम नहीं देते। इनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने पर हतोत्साहित किया जाता है। इस उदाहरण में किस मौलिक-अधिकार का उल्लंघन हो रहा है |
इनमें कौन-मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और क्यों?
