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‘गाँवों में रहकर जीवन बिताना, शहरी जीवन की तुलना में, अधिक आनन्ददायक तथा आसान होता है।’ - इस विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए। - Hindi (Indian Languages)

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Question

निम्नलिखित विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो:

‘गाँवों में रहकर जीवन बिताना, शहरी जीवन की तुलना में, अधिक आनन्ददायक तथा आसान होता है।’ - इस विषय के पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

Writing Skills
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Solution

ग्रामीण जीवन

यह संसार ईश्वर की अद्भुत रचना है। उसी असीम शक्ति के प्रभाव से जल और वायु के संयोग द्वारा इस पृथ्वी पर जल, थल और आकाश में असंख्य जीवों का जन्म हुआ। इसी प्रक्रिया में मानव का भी निर्माण हुआ। मानव ने अपनी संरचना और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को सुरक्षित रखते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त की है।

हम सभी ने कक्षा में पढ़ा है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है। प्रारंभिक मानव का जीवन पशुओं के समान घुमंतू था, जैसा कि हमें आदिमानव के इतिहास से ज्ञात होता है। वह कच्चा मांस खाता था, नदियों और तालाबों का पानी पीता था तथा पेड़ों की पत्तियों और छाल से शरीर ढकता था। जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करना और उनका शिकार करना उसकी दिनचर्या थी। जैसे-जैसे मानव की आवश्यकताएँ बढ़ीं, उसने उनके अनुसार प्रयास किए। जब उसने कृषि को अपनाया, तो उसका घुमंतू जीवन समाप्त हो गया और स्थायी बस्तियों का निर्माण हुआ। इन्हीं बस्तियों की सबसे छोटी इकाई गाँव कहलाती है।

महात्मा गाँधी का मानना था कि जिसने भारत के गाँव नहीं देखे, उसने भारत को नहीं देखा, क्योंकि भारत मूलतः गाँवों का देश है। एक स्वस्थ राष्ट्र की कल्पना ग्रामीण जीवन के बिना संभव नहीं है। ग्रामीण परिवेश सरल, स्वच्छ और छल-कपट से मुक्त होता है, जहाँ मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन किए जाते हैं। भारत के गाँव विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों - पर्वतीय, मैदानी, पठारी, वन, रेगिस्तानी और समुद्री क्षेत्रों में बसे हुए हैं। प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार ही मानव जीवन का विकास होता है। उत्तर भारत का अधिकांश भाग मैदानी क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यहाँ मैदानी गाँवों का विशेष महत्व है।

शहरों में वातावरण को शुद्ध रखने के लिए पार्क बनाए जाते हैं और सड़कों के किनारे पेड़ लगाए जाते हैं। अब कल्पना कीजिए उस गाँव की, जो चारों ओर फैले हरे-भरे खेतों के बीच स्थित हो और जहाँ तक नज़र जाए हरियाली ही हरियाली हो। वहाँ का वातावरण अत्यंत स्वच्छ और शुद्ध होता है। गाँवों में बिना रसायन मिला ताज़ा दूध और घी मिलता है। मौसमी और बाहरी फल भी समय-समय पर उपलब्ध होते हैं। सरकारी प्रयासों से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, दैनिक जरूरतों के लिए छोटा बाजार, यातायात के साधन और रोजगार के अवसर उपलब्ध रहते हैं। सिंचाई के लिए नहरों और नलकूपों की व्यवस्था होती है। कृषि कार्यों के लिए आधुनिक यंत्र और एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी गाँव में होता है।

गाँव का प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ा होता है। कोई रिश्ते में चाचा है, तो कोई मामा। सभी मिलकर गाँव की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। सुख-दुःख में लोग तन, मन और धन से एक-दूसरे की सहायता करते हैं। विवाह जैसे कार्यक्रमों में भी सामूहिक सहयोग देखने को मिलता है। इस प्रकार गाँव की संरचना आत्मनिर्भर, प्रेमपूर्ण और सौहार्दपूर्ण होती है। ऐसा स्वाभाविक आनंद शहर की किसी गली में देखने को नहीं मिलता। इसलिए निस्संदेह कहा जा सकता है कि ग्रामीण जीवन वास्तव में धन्य है।

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