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Question
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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एक युग बीत जाने पर भी मेरी स्मृति से एक घटा भरी अश्रुमुखी सावनी पूर्णिमा की रेखाएँ नहीं मिट सकी हैं। उन रेखाओं के उजले रंग न जाने किस व्यथा से गीले हैं कि अब तक सूख भी नहीं पाए, उड़ना तो दूर की बात है। उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी, आपके किसी ने राखी नहीं बाँधी? अवश्य ही उस समय मेरे सामने उनकी बंधनशून्य कलाई और पीले कच्चे सूत की ढेरों राखियाँ लेकर घूमने वाले यजमान खोजियों का चित्र था। पर अपने प्रश्न के उत्तर ने मुझे क्षण भर के लिए चौंका दिया। ‘कौन बहिन हम जैसे भुक्खड़ को भाई बनावेगी!’ में उत्तर देने वाले के एकाकी जीवन की व्यथा थी या चुनौती, यह कहना कठिन है पर जान पड़ता कि किसी अव्यक्त चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी, जिसने दिव्य वर्ण-गंध मधुवाले गीत सुमनों से भारती की अर्चना भी की है और बर्तन माँजने, पानी भरने जैसी कठिन श्रम साधना से उत्पन्न खेद बिंदुओं से मिट्टी का श्रृंगार भी किया है। दिन-रात के पगों से वर्षों की सीमा पार करने वाले अतीत ने आग के अक्षरों में आँसू के रंग भर-भरकर ऐसी अनेक चित्रकथाएँ आँक डाली हैं, जितनी इस महान कवि और असाधारण मानव के जीवन की मार्मिक झाँकी मिल सकती है पर उन सबको सँभाल सके; ऐसा एक चित्राधार पा लेना सहज नहीं। |
- संजाल पूर्ण कीजिए: (2)

- निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए: (2)
- चित्रकथा -
- स्मृतियाँ -
- रेखा -
- राखी -
- ‘रक्षाबंधन त्यौहार’ इस विषय पर ४० से ५० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)
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Solution

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- चित्रकथा - चित्रकथाएँ
- स्मृतियाँ - स्मृति
- रेखा - रेखाएँ
- राखी - राखियाँ
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रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पावन पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। भाई उसे जीवनभर रक्षा का वचन देता है। यह पर्व केवल सगे भाई-बहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक भी है।
