Advertisements
Advertisements
Question
बाढ़ की सही जानकारी लेने और बाढ़ का रूप देखने के लिए लेखक क्यों उत्सुक था?
Advertisements
Solution
लेखक ने हमेशा बाढ़ के विनाश के विषय में सुना हुआ था, उसने अनेकों रचनाएँ भी उस विनाशलीला पर समर्पित की हुई थी और अनेकों पुरस्कार प्राप्त किए थे। पर कभी स्वयं बाढ़ को भोगने का अवसर उसे प्राप्त नहीं हुआ था। इसी कारणवश वह बाढ़ की विनाशलीला को स्वयं भोगने के लिए उत्सुक था। लेखक अपनी आँखों से इस पानी को शहर में घुसते हुए देखना चाहता था कि उसकी विनाशलीला कैसी होती है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
'अच्छा है, कुछ भी नहीं। कलम थी, वह भी चोरी चली गई। अच्छा है, कुछ भी नहीं—मेरे पास।' - मूवी कैमरा, टेप रिकॉर्डर आदि की तीव्र उत्कंठा होते हुए भी लेखक ने अंत में उपर्युक्त कथन क्यों कहा?
लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में -
(क) लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए।
(ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।
आज माटी वाली बुड्ढे को कोरी रोटियाँ नहीं देगी - इस कथन के आधार पर माटी वाली के हृदय के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।
'विस्थापन की समस्या' पर एक अनुच्छेद लिखिए।
गया और उसके घरवाले हीरा-मोती को नियंत्रण में करने के लिए क्या योजना बना रहे थे?
अपनी यात्रा के दौरान लेखक को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
यात्रा-वृत्तांत के आधार पर तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का शब्द-चित्र प्रस्तुत करें। वहाँ की स्थिति आपवेफ राज्य/शहर से किस प्रकार भिन्न है?
तिब्बत का प्राकृतिक सौंदर्य अनुपम है। स्पष्ट कीजिए।
पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में पनप रही 'दिखावे की संस्कृति' पर विचार व्यक्त कीजिए।
वृंदावन में सुबह-शाम सैलानियों को होने वाली अनुभूति अन्य स्थानों की अनुभूति से किस तरह भिन्न है?
सालिम अली पक्षी-प्रेमी होने के साथ-साथ प्रकृति प्रेमी भी थे। साँवले सपनों की याद पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
‘साँवले-सपनों की याद’ पाठ के आधार पर बताइए कि सालिम अली को नैसर्गिक जिंदगी का प्रतिरूप क्यों कहा गया है?
‘साँवले सपनों की याद’ पाठ के आधार पर बताइए कि सामान्य लोग पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान किस तरह दे सकते हैं?
बिठूर पहुँचकर अंग्रेज सैनिक दल ने क्या किया?
नीचे दी गई पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए -
तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते, हम परदे पर कुर्बान हो रहे हैं।
‘मगर यह कितनी बड़ी ट्रेजडी है’, लेखिका ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है?
क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज का वातावरण पढ़ाई के लिए आदर्श था। पठित पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए।
महादेवी और सुभद्रा कुमारी की मुलाकात और मित्रता का वर्णने अपने शब्दों में कीजिए।
'मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।' इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि -
(क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
