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अगर दूरध्वनि एवं भ्रमणध्वनि न होते तो ..... - Hindi [हिंदी]

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Question

अगर दूरध्वनि एवं भ्रमणध्वनि न होते तो .....

Writing Skills
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Solution

अगर दूरध्वनि एवं भ्रमणध्वनि न होते तो…

कल्पना कीजिए, एक ऐसी दुनिया जहाँ न दूरध्वनि होता और न ही भ्रमणध्वनि। संवाद के लिए हमें पत्रों, दूतों या संदेशवाहकों पर निर्भर रहना पड़ता। तत्काल सूचना का कोई साधन न होने के कारण संचार की गति बेहद धीमी होती।

व्यापार और नौकरी की दुनिया में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलता। मीटिंग्स के लिए लंबी यात्राएँ करनी पड़तीं, संदेश पहुँचाने में कई दिन लग जाते और किसी आपात स्थिति में भी समय पर सहायता मिलना कठिन हो जाता। एक साधारण बातचीत के लिए भी इंतजार करना पड़ता, जिससे व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों जीवन प्रभावित होते।

समाज का ताना-बाना भी अलग ही होता। परिवार और मित्रों से जुड़ाव बनाए रखना कठिन हो जाता, खासकर तब, जब वे दूर किसी शहर या देश में होते। रिश्तों में दूरियाँ बढ़ जातीं और किसी से अचानक मिलने की योजना बनाना लगभग असंभव हो जाता।

समाचार और सूचना के आदान-प्रदान की गति भी बेहद धीमी होती। आज जहाँ हम एक क्लिक में दुनिया भर की खबरें जान सकते हैं, वहीं तब हमें अखबारों या किसी संदेशवाहक के माध्यम से जानकारी प्राप्त करनी पड़ती, जो अक्सर विलंबित और अपूर्ण होती।

आपातकालीन परिस्थितियों में भी बड़ी परेशानी होती। दुर्घटना, बीमारी या किसी संकट की स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर पाना असंभव हो जाता। जीवन का हर क्षेत्र, चाहे वह चिकित्सा हो, शिक्षा हो, व्यापार हो या सामाजिक जीवन, सब कुछ धीमा और जटिल हो जाता।

संक्षेप में, अगर दूरध्वनि एवं भ्रमणध्वनि न होते तो जीवन की रफ्तार बेहद धीमी होती, रिश्तों में दूरियाँ बढ़ जातीं और हर जरूरी काम के लिए हमें अतिरिक्त समय और श्रम लगाना पड़ता। तकनीकी प्रगति भी सीमित हो जाती और दुनिया की तस्वीर कुछ अलग ही होती, कमजोर संचार व्यवस्था और धीमी जीवनशैली वाली!

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Chapter 17: संदेश - पाठ्य प्रश्न [Page 11]

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Balbharati Hindi Ekatmik [Hindi] Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 17 संदेश
पाठ्य प्रश्न | Q १. | Page 11
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