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Question
अधिगम अंतरण कैसे घटित होता है ?
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Solution
अधिगम अंतरण को प्रायः प्रशिक्षण अंतरण या अंतरण प्रभाव कहा जाता है। इसका तात्पर्य नए अधिगम पर पूर्व अधिगम के प्रभाव से है। यदि पूर्व अधिगम नए अधिगम में सहायक होता है तो अंतरण को धनात्मक कहा जाता है। यदि नया अधिगम पहले के अधिगम के कारण मंद हो जाता है तो इसे ऋणात्मक अंतरण कहते हैं। सहायक या मंदक प्रभाव की अनुपस्थिति शून्य अंतरण को व्यक्त करती है।
मान लीजिए, आप यह जानना चाहते हैं कि क्या अंग्रेजी भाषा का सीखना फ्रांसीसी भाषा के सीखने को प्रभावित करता है? इसका अध्ययन करने के लिए आप प्रतिभागियों का एक बड़ा प्रतिदर्श चुनते हैं और उसे यद्च्छिक रूप से दो समूहों में बाँट देते हैं। एक समूह का उपयोग प्रायोगिक दशा के लिए और दूसरा समूह नियंत्रित दशा के लिए तय किया जाता है। प्रायोगिक समूह के प्रतिभागी एक वर्ष तक अंग्रेजी भाषा सीखते हैं और उनका परीक्षण कर लिया जाता है कि एक वर्ष में उनको अंग्रेजी भाषा का कितना ज्ञान हुआ। दूसरे वर्ष में वे फ्रांसीसी भाषा सीखना प्रारंभ करते हैं और एक वर्ष बीतने पर उनके फ्रांसिसी भाषा के ज्ञान का परीक्षण कर लिया जाता है। नियंत्रित समूह के प्रतिभागी पहले वर्ष में अंग्रेजी भाषा सीखने की बजाय अपना दैनिक कार्य ही करते हैं और एक वर्ष के बाद फ्रांसीसी भाषा सीखना प्रारंभ कर देते हैं। एक वर्ष तक फ्रांसीसी भाषा सीखने के बाद इनके भी फ्रांसीसी भाषा के ज्ञान की उसी तरह से परीक्षा ली जाती है। इसके बाद दोनों समूहों के फ्रांसीसी भाषा परीक्षा में प्राप्त अंकों की तुलना की जाती है। यदि प्रायोगिक समूह के अंक नियंत्रित समूह के अंकों से अधिक हैं तो इसका अर्थ होगा कि अंग्रेजी भाषा सीखने का फ्रांसीसी भाषा सीखने पर धनात्मक अंतरण प्रभाव पड़ा। परंतु यदि प्रायोगिक समूह के अंक नियंत्रित समूह से कम आते हैं तो इसका अर्थ होगा कि अंग्रेजी भाषा सीखने का फ्रांसीसी भाषा सीखने पर ऋणात्मक अंतरण प्रभाव पड़ा। इसी प्रकार यदि दोनों समूहों के अंकों में सार्थक अंतर न मिले तो यह कहा जाएगा कि अंग्रेजी भाषा सीखने का फ्रांसीसी भाषा सीखने पर अंतरण प्रभाव की मात्रा शून्य है।
उल्लेखनीय है कि अंतरण प्रभाव के अध्ययन में अविशिष्ट अंतरण और विशिष्ट अंतरण में भेद किया जाता है। यह सुपरिचित तथ्य है कि पूर्व अधिगम सदा ही धनात्मक अविशिष्ट अंतरण की ओर ले जाता है। यह केवल विशिष्ट अंतरण में ही होता है कि अंतरण प्रभाव भनात्मक या ऋणात्मक होता है और कुछ अवस्थाओं में प्रभाव शून्य भी होता है। हालाँकि वास्तव में, अविशिष्ट अंतरण के कारण शून्य अंतरण सैद्धान्तिक रूप से अतर्कसंगत है।
