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अच्छा, मेरे महान कनु, मान लो कि क्षण भर को मैं यह स्वीकार लूँ कि मेरे ये सारे तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ भावावेश थे, सुकोमल कल्पनाएँ थीं रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे - Hindi

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Question

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

अच्छा, मेरे महान कनु,
मान लो कि क्षण भर को
मैं यह स्वीकार लूँ
कि मेरे ये सारे तन्मयता के गहरे क्षण
सिर्फ भावावेश थे,
सुकोमल कल्पनाएँ थीं

रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे -
मान लो कि
क्षण भर को
मैं यह स्वीकार लूँ
कि पाप-पुण्य, धर्माधर्म, न्याय-दंड
क्षमा-शीलवाला यह तुम्हारा युद्ध सत्य है −

तो भी मैं क्या करूँ कनु,

  1. उत्तर लिखिए:       (२)
  2. उचित प्रत्यय लगाकर नए शब्द तैयार कीजिए:       (२)
    1. क्षण − ---------
    2. कल्पना − ---------
    3. तन्मय − ---------
    4. धर्म − ---------
  3. ‘युद्ध विनाशकारी होता है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।       (२)
Comprehension
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Solution



    1. क्षण − क्षणिक
    2. कल्पना − काल्पनिक
    3. तन्मय − तन्मयता
    4. धर्म − धार्मिक
  1. कोई भी युद्ध नहीं चाहता क्योंकि इसका परिणाम बेहद विनाशकारी होता है। फिर भी कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि युद्ध अनिवार्य हो जाता है। युद्ध में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई सैनिक मारे जाते हैं, जिससे उनके परिवार बिखर जाते हैं। युद्ध के लिए हथियारों और संसाधनों की व्यवस्था में भारी खर्च होता है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है। जो धन देश के विकास में लगना चाहिए, वह युद्ध में खर्च हो जाता है। इसका असर केवल वर्तमान पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी लंबे समय तक पड़ता है।
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