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अभिकथन (A): (√2 +√3) एक अपरिमेय संख्या है। तर्क (R): दो अपरिमेय संख्याओं का योगफल सदैव ही एक अपरिमेय संख्या होती है।

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Question

अभिकथन (A): (`sqrt2 + sqrt3`) एक अपरिमेय संख्या है।

तर्क (R): दो अपरिमेय संख्याओं का योगफल सदैव ही एक अपरिमेय संख्या होती है।

Options

  • अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही हैं और तर्क (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  • अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही हैं, परन्तु तर्क (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।

  • अभिकथन (A) सही है, परन्तु तर्क (R) गलत है।

  • अभिकथन (A) गलत है, परन्तु तर्क (R) सही है।

MCQ
Assertion and Reasoning
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Solution

अभिकथन (A) सही है, परन्तु तर्क (R) गलत है।

स्पष्टीकरण:

(`sqrt2 + sqrt3`) दो अपरिमेय संख्याओं का योग है जिसे `p/q` के रूप में नहीं लिखा जा सकता। अतः यह एक अपरिमेय संख्या है। अभिकथन (A) सही है।

मान लीजिए हमारे पास दो अपरिमेय संख्याएँ हैं:

पहली संख्या: `(2 + sqrt3)` यह अपरिमेय है।

दूसरी संख्या: `(2 - sqrt3)` यह भी अपरिमेय है।

अब इनका योगफल निकालें:

`(2 + sqrt3) + (2 - sqrt3)`

= 2 + 2 = `sqrt3 - sqrt3`

= 4

चूँकि 4 एक परिमेय संख्या है, इसलिए यह सिद्ध होता है कि दो अपरिमेय संख्याओं का योग हमेशा अपरिमेय नहीं होता। इसी वजह से तर्क (R) गलत है।

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