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Question
आंध्रा प्रदेश में चले शराब - विरोधी आंदोलन ने देश का ध्यान कुछ गंभीर मुद्दों की तरह खिंचा। ये मुद्दे क्या थे?
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Solution
- आंध्रा प्रदेश में चले शराब - विरोधी आंदोलन ने देश का ध्यान निम्नलिखित गंभीर मुद्दों की ओर खिंचा -
- शराब पिने के कारण पुरुष शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कमजोर होते जा रहे थे और इसलिए वे खेतीबाड़ी के काम में अधिक भागीदारी नहीं करते थे जिससे कृषि उत्पाद पर बुरा प्रभाव पड़ता था।
- शराब पीने के कारण परिवारों की आर्थिक दशा बुरी तरह प्रभावित थी। लोग उधार लेकर भी शराब पीते थे और कर्ज के बोझ से दये हुए थे।
- शराब ठेकेदार उधार देकर भी शराब पीने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते थे और कई बार खेती की भूमि भी कर्ज उतारने में चली जाती थी।
- पुरुष शराब में धुत रहने के कारण भी खेती नहीं जा पाते थे और घरेलू कामों के साथ खेती - बाड़ी का काम भी महिलाओं के सिर पर बढ़ता जा रहा था।
- अधिक शराब पीने से पुरुष घर में मारपीट भी करते थे और महिलाओं को पिटे जाने तथा बच्चों पर भी मारपीट करने की घटनाएँ दैनिक रूप से घटने लगी।
- शराब खोरी और मारपीट से पारिवारिक अर्थव्यवस्था चरमराने लगी। इतनी ही नहीं घरों में तनाव का वातावरण भी फैलने लगा और लगभग सारे गांव की महिलाएं इससे तनावग्रस्त तथा परेशान रहने लगी थीं।
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निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:
लगभग सभी नए सामाजिक आंदोलन नयी समस्याओं जैसे - पर्यावरण का विनाश, महिलाओं की बदहाली, आदिवासी संस्कृतिक का नाश और मानवाधिकारों का उल्लंघन के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे। इनमें से कोई भी अपनेआप में समाजव्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नहीं जुड़ा था। इस अर्थ में ये आंदोलन अतीत की क्रांतिकारी है सामाजिक आंदोलनों का एक बड़ा दायरा ऐसी चीजों की चपेट में है की वह एक ठोस तथा एकजुट जन आंदोलन का रूप नहीं ले पाता और न ही वंचितों और गरीबों के लिए प्रासंगिक हो पाता है। ये आंदोलन बिखरे - बिखरे हैं, प्रतिक्रिया के तत्वों से भरे हैं, अनियत है और बुनियादी सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नहीं है। 'इस' या 'उस' के विरोध (पशिचमी - विरोधी, पूंजीवादी विरोध, 'विकास - विरोधी, आदि) में चलने के कारण इनमे कोई संगति आती हो अथवा दबे - कुचले लोगों और हाशिए के समुदायों के लिए ये प्रासंगिक हो पाते हों - ऐसी बात नहीं।
- रजनी कोठरी
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