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Question
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
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आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का, मैं न बोला, किंतु मेरी रागिनी बोली मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते, मनु नहीं, मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी, |
(i) कॉलम-1 को कॉलम-2 से सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प छाँटकर लिखिए: (1)
| कॉलम-1 | कॉलम-2 |
| (1) चाँद | (I) स्वप्न |
| (2) रागिनी | (II) सत्ताधारी निरंकुश शासक |
| (3) बुलबुले | (III) लेखनी/कविता |
विकल्पः
- (1 - II), (2 - I), (3 - III)
- (1 - II), (2 - III), (3 - I)
- (1 - III), (2 - I), (3 - II)
- (1 - I), (2 - III), (3 - II)
(ii) आज का मानव अपने पूर्वजों से भिन्न कैसे है? अनुपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए: (1)
- वह अपनी कल्पना को सच कर सकता है।
- वह विचारों से अत्यंत विवेकशील है।
- वह अपने सपने को साकार करना जानता है।
- वह सिर्फ सपने देखना ही जानता है।
(iii) काव्यांश में ‘नए घर की नींव रखने’ से क्या अभिप्राय है? (1)
- नवीन मान्यताओं को स्वीकारना।
- नए घर का निर्माण करना।
- नए घर का आधार बनाना।
- नए समाज की रचना करना।
(iv) काव्यांश का मूलभाव 25-30 शब्दों में लिखिए। (2)
(v) काव्यांश में मानव को धन्य क्यों कहा गया है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
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Solution
(i) (1 - II), (2 - III), (3 - 1)
स्पष्टीकरण:
| कॉलम-1 | कॉलम-2 |
| (1) चाँद | (II) सत्ताधारी निरंकुश शासक |
| (2) रागिनी | (III) लेखनी/कविता |
| (3) बुलबुले | (I) स्वप्न |
(ii) वह सिर्फ सपने देखना ही जानता है।
(iii) नए समाज की रचना करना।
(iv) काव्यांश में कवि बताना चाहता है कि मानव जीवन नश्वर है फिर भी मनुष्य समाज के निर्माण में अपना योगदान देने से पीछे नहीं रहता है। वह अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है और उज्ज्वल भविष्य के स्वप्न देखता है।
(v) काव्यांश में मनुष्य को धन्य कहा गया है क्योंकि-
- मनुष्य जीवन की नश्वरता जानते हुए भी वह नए सृजन में निरंतर लगा रहता है।
- मानव अन्याय और अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाता है बल्कि उनका दृढ़ विरोध करता है।
